
अपनी लिखावट अपने व्यक्तित्व का आईना है, इसके माध्यम से अपेक्षित सुधार संभव है – ग्राफोलॉजी थेरेपिस्ट ई. अनिल बंसल
मंदसौर में हैंडराइटिंग एनालिस्ट कार्यशाला आयोजित
मन्दसौर से डॉ घनश्याम बटवाल की रिपोर्ट
मंदसौर। प्राचीन संस्कृति में लेखन का महत्व रहा है ओर प्रमाण है कि महर्षि वेद व्यास, महर्षि वाल्मीकि आदि ने ग्रंथ लिखे, पांचवें वेद आयुर्वेद में चरक , सुश्रुत ने संहिता रचना की , आज भी विभिन्न विषयों पर सैंकड़ों पांडु लिपियों का संग्रह उपलब्ध है यह प्रामाणिक रूप से हस्त लेखन के श्रेष्ठ उदाहरण है जो इतिहास है पर आजकल हाथों से लेखन कम हो रहा है कम्प्यूटर मोबाइल जैसे साधन आए हैं विशेष रूप से बच्चों एवं युवाओं में नए साधन से जुड़े होने से लेखन से दूरी हो रही है जबकि व्यक्तित्व विकास में हस्त लेखन एक उत्तम माध्यम है
प्रश्न उठाए जाते हैं कि क्या लिखावट बदलने से सोच और व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आ सकता है? क्या हस्तलेखन किसी व्यक्ति के मानसिक, भावनात्मक और व्यवहार के बारे में संकेत दे सकता है? इन्हीं विषयों को लेकर शहर के नई आबादी स्थित देव होटल सभागार में ग्राफोथेरेपी (Graphotherapy) और हैंडराइटिंग एनालिस (Handwriting Analysis) विषय पर प्रेरणादायी और रोचक आयोजन किया गया। इस पद्धति की कार्यशाला और उसके सामाजिक उपयोगों की जानकारी दी।

वडोदरा गुजरात के हैंडराइटिंग एनालिस्ट एवं ग्राफो एनेलेटिकल थेरेपिस्ट विशेषज्ञ केमिकल इंजीनियर श्री अनिल बंसल ने कार्यशाला में बताया हेंड राइटिंग और हस्ताक्षर के बारे में अपने लेखन में शब्दों के प्रयोग, उतार चढ़ाव, अक्षर की बनावट, विशेष रूप के साथ शब्द पर दबाव आदि के माध्यम से व्यक्ति का व्यक्तित्व जाना जा सकता है और कोई कमी या कोई बीमारी है तो पहचान कर उपचार भी किया जा सकता है और सैकड़ों लोगों पर इसके माध्यम से बेहतर सुधार हुआ है।
आपने बताया कि पार्किंसन, डिमेंशिया, न्यूरो प्रॉब्लम, ब्लड प्रेशर डायबिटीज, किडनी ट्रबल आदि जटिल रोगों पर भी नियंत्रण किया जा सकता है, डॉक्टर की मेडिसीन के साथ ग्राफोलॉजी थेरेपी से जल्दी और आश्चर्यजनक सुधार देखा गया है।
हाथ की लिखावट (हैंडराइटिंग) हमारे जीवन और भविष्य के लिए कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है, इस रोचक विषय पर जानकारी साझा की।
एक विशेष सत्र और कार्यशाला आयोजित कर मीडिया से चर्चा की।

अनिल बंसल हस्तलेखन विश्लेषण (ग्राफोलॉजी) के क्षेत्र में एक जाना-माना नाम है। उनकी विद्वता और हस्तलेखन से जुड़ी सघन जानकारी को लेकर कई सेमिनार और चचार्एं सफलतापूर्वक आयोजित हो चुकी हैं।
विशेषज्ञ श्री बंसल ने बताया कि हमारी लिखावट हमारे व्यक्तित्व के राज कैसे खोलती है और जीवन को सही दिशा देने में कैसे मददगार साबित हो सकती है। आपने बताया कि हमारे शरीर में कुछ परिवर्तन होता है इसका संकेत भी हमे हमारी हस्तलेखन से प्राप्त होता है। आपने बताया कि इस विधा का शोध अभी सिर्फ अंग्रेजी भाषा में हुआ है हिन्दी में नहीं। आपने बताया कि हस्ताक्षर हमेशा साफ सुधरा होना चाहिए, अक्षर कटने नहीं चाहिए और हस्ताक्षर का पहला अक्षर हमेशा बड़ा होना चाहिए। कार्यशाला में आये पत्रकारों का भी आपने हस्तलेखन करवाकर उनके बारे में बताया। मीडिया से संवाद कर जिज्ञासा और प्रश्नों का समाधान किया।

इसके पूर्व समाजसेवी एवं पार्षद सुनिल बंसल ने बताया कि श्री अनिल बंसल का मंदसौर से संबंध है और वे हैंडराइटिंग एनालिस्ट और एनेलेटिकल थेरेपिस्ट विशेषज्ञ हैं साथ ही केमिकल इंजीनियर, योग के साथ फेंगशुई के ज्ञाता हैं। इस ज्ञान और विशेषज्ञता के द्वारा श्री अनिल बंसल ने कोलकाता, बारानगर, टीटागढ़ आदि स्थानों की औद्योगिक इकाइयों जूट मिलों पर महत्वपूर्ण और निर्णायक संकेत दिए हैं। इंटरनेशनल मैगज़ीन इनसाइड आउटसाइड, परमेश्वर गोदरेज , अरुण नंदा, रेडिफमेल सहित अन्य विशिष्ट जन आपके पोर्टफोलियो से जुड़े हैं और ज्ञान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। कुकिंग में भी आपकी स्पेशलिटी है जो विशेष गुण है। आपके सुपुत्र श्री हर्षुल बंसल भी इस विधा में निपुण हैं और ग्राफोलॉजी फील्ड में काम कर रहे हैं।
इस मौके पर श्री श्रवण अग्रवाल, श्री ओमप्रकाश गर्ग, श्री लोकेश बंसल श्री यश लोहार, पत्रकार सहित गणमान्य जनों की उपस्थिति रही।

विशेषज्ञ श्री अनिल बंसल द्वारा बताया गया कि ग्राफोथेरेपी एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें लिखावट का सकारात्मक बदलाव लाकर व्यक्ति के व्यवहार, आत्मविश्वास और जीवन में सुधार लाने का प्रयास किया जाता है। वहीं हैंडराइटिंग एनालिसीस से लिखावट के माध्यम से व्यक्तित्व, कार्यशैली, निर्णय क्षमता और मानसिक प्रवृत्तियों को समझने का प्रयास किया जाता है।
लिखावट केवल शब्दों को कागज पर उतारना का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिकता की कार्यप्रणाली से भी जुड़ी होती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह चिकित्सकीय जांच या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है।

बंसल ने पॉवर प्वाइंट प्रेजेंटेशन ( PPT) माध्यम से सिलसिलेवार चित्रों और ग्राफिक्स द्वारा जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम का उद्देश्य ग्राफोथेरेपी और हस्तलेखन विज्ञान को समाज के सामने एक परिचित बनाना था। इसके सामाजिक उपयोगों को जागरूक देना रहा।





