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मध्यप्रदेश में पदोन्नतियां शुरु, विरोध में सपाक्स गई कोर्ट में, 7 जुलाई को सुनवाई

मध्यप्रदेश में पदोन्नतियां शुरु, विरोध में सपाक्स गई कोर्ट में, 7 जुलाई को सुनवाई

भोपाल: मध्यप्रदेश में महाधिवक्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैधनाथन के विधिक परामर्श के बाद मध्यप्रदेश में नौ साल बाद विभिन्न विभागों में पदोन्नतियों की शुरुआत हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा सभी विभागों को पंद्रह जुलाई तक डीपीसी की बैठकें पूरी करने के निर्देश के बाद सबसे पहली पदोन्नति विधानसभा सचिवालय ने की है। विधानसभा ने अपने बारह अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रमोशन कर दिए।

इधर सपाक्स ने पदोन्नति नियम 2025 के अंतर्गत पदोन्नति करने का विरोध किया है। सपाक्स ने इसके लिए मुख्य सचिव अनुराग जैन को भी ज्ञापन सौपा है और कोर्ट की शरण ली है जिस पर सात जुलाई को सुनवाई होगी।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पदोन्नति की प्रक्रिया शुरु करने के निर्देश के बाद विधानसभा सचिवालय ने बुधवार को बारह अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति देने के आदेश जारी कर दिए। यह बात और है कि विधानसभा में प्रमोशन पाने वाले सभी अधिकारी-कर्मचारी पहले से ही इन पदों के प्रभार पर काम कर रहे थे अब पदोन्नति के बाद इन सभी को इन पदों के प्रभार की जगह मूल रुप से जिम्मेदारी मिल गई है। समयमान वेतनमान के तहत इन सभी को पहले ही वेतनमान का लाभ मिल चुका है। जो अधिकारी कर्मचारी पदोन्नत किए गए है उनमें मूलत: अनुभाग अधिकारी के पद पर पदस्थ राजेन्द्र वर्मा, रवीन्द्र नाथ दुबे, नरेन्द्र कुमार मिश्रा तथा कार्यवाही संपादक मोहनलाल मनवानी और शिष्टाचार अधिकारी माधव दफ्तरी को अवर सचिव बनाया गया है। अनुसंधान अधिकारी वीडी गोयल को संचालक पुस्तकालय तथा अनुसंधान एवं संदर्भ, दिमझिम मोगिया और अजय चौरे को वरिष्ठ प्रतिवेदक से सलेक्ट ग्रेड रिपोर्टर, नरेश हिमतानी को कार्यवाही संपादक, हरीश श्रीवास को स्टाफ आफीसर से प्रशासकीय अधिकारी, महावीर सिंह को जनसंपर्क अधिकारी से सूचना अधिकारी, विनोद कुमार दुबे और रुपेश सिंह को निज सचिव से स्टाफ आफिसर बनाया गया है।

पदोन्नति को लेकर जीएडी ने सभी विभागों को डीपीसी जल्द से जल्द करने के निर्देश दिए हे। कई विभागों में गुरु वार को भी इस संबंध में कार्यवाही की गई। पदोन्नति के लिए पहली डीपीसी जल्द से जल्द करने को कहा गया है। अधिकांश विभाग अविवादित मामलों में एक सप्ताह के भीतर पदोन्नति के आदेश जारी कर देंगे। सभी का फोकस इस माह प्रमोशन के लिए पात्र अधिकारियों कर्मचारियों की डीपीसी कराने पर रहेगा। सारे पदोन्नति आदेशों में यह कहा जा रहा है कि ये सुप्रीम कोर्ट और मध्यप्रदेश में लंबित याचिकाओं के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।

*सपाक्स कोर्ट में-* 

इधर सपाक्स के अध्यक्ष केदार सिंह तोमर ने इस संबंध में मुख्य सचिव को ज्ञापन सौपा है। उन्होंने पदोन्नति नियम 2025 के अधीन पदोन्नतियां करने का विरोध किया है। तोमर का कहना है कि पहले असंवैधानिक घोषित हो चुके प्रमोशन में रिजर्वेशन वाले नियमों के तहत पदोन्नति पाने वालों को डिमोट करके क्रीमी लेयर का निर्धारण करें। हाईकोर्ट में लगी सपाक्स की याचिका पर सोमवार 7 जुलाई को सुनवाई होगी।