
ASI is not Correct: धार के तत्कालीन कलेक्टर वी सी रावत ने 1992 में वाग्देवी की प्रतिमा लाने की, की थी पहल, ब्रिटिश हाई कमिश्नर को सौंपा था ज्ञापन
तत्कालीन कलेक्टर वीसी रावत ने पत्राचार का प्रमाण भी दिया!
धार से वरिष्ठ पत्रकार छोटू शास्त्री की खास रिपोर्ट
धार। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया (ASI) का यह कहना सही नहीं है कि भोजशाला की वाग्देवी की मूर्ति को इंग्लैंड से वापस लाने के लिए कभी कोई पहल नहीं की गई और न पत्राचार किया गया।
इस संबंध में धार के तत्कालीन कलेक्टर वीसी रावत ने जानकारी दी है कि ASI का यह कहना सही नहीं है कि भोजशाला की वाग्देवी प्रतिमा को लाने की कभी कोई पहल ही नहीं की गई। पूर्व IAS अधिकारी रावत काफी साल पहले रिटायर हो चुके हैं और वर्तमान में इंदौर में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें वाग्देवी प्रतिमा को लेकर की गई पहल आज भी याद है।

उन्होंने मीडियावाला से चर्चा करते हुए बताया कि अक्टूबर 1992 में धार में कलेक्टर रहते हुए मैने इंग्लैंड के हाई कमिश्नर सर निकोलस फैन को उनकी मांडू यात्रा के अवसर पर एक ज्ञापन प्रस्तुत कर वाग्देवी मूर्ति को वापस करने का अनुरोध किया था। उन्होंने लिखित आश्वासन भेजा था कि इस संबंध में ब्रिटिश म्यूजियम से जानकारी लेकर कार्यवाही की जाएगी।
अप्रैल 1993 में उनका उत्तर मुझे प्राप्त हुआ जिसमें ब्रिटिश म्यूजियम लंदन का जवाब भी संलग्न था। उन्होंने प्रमाण के तौर पर दोनों पत्र भी दिए हैं।


उनके उत्तर में पत्र में कहा गया था की मूर्ति की सही पहचान तय नहीं है। संभवत यह जैन देवी अंबिका की मूर्ति भी हो सकती है। परंतु अब हाई कोर्ट द्वारा पूर्ण जांच के पश्चात मूर्ति की पहचान निर्धारित की जा चुकी है।
धार के तत्कालीन कलेक्टर रावत ने बताया कि इस पत्राचार की प्रतिलिपि मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को स्वयं जाकर प्रस्तुत की थी। रावत का कहना है कि निश्चित रूप से शासन स्तर पर भी इस मामले में कोई कार्यवाही की होगी। ऐसी स्थिति में ASI का यह कहना सही नहीं है की वाग्देवी मूर्ति को प्राप्त करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।





