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Doctors Strike Illegal : डॉक्टर्स की हड़ताल को हाईकोर्ट ने अवैध कहा!

हाईकोर्ट के डॉक्टर्स को तत्काल काम पर लौटने के आदेश!  

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Doctors Strike Illegal : डॉक्टर्स की हड़ताल को हाईकोर्ट ने अवैध कहा!

Indore : हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध बताते हुए कहा कि डॉक्टर्स तत्काल काम पर लौटें। आज प्रदेश में 15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई। हालांकि सरकार वैकल्पिक व्यवस्था में लगी है। इसके अलावा हड़ताली डॉक्टरों को मनाने की भी कोशिश कर रही है। जबकि, हाईकोर्ट ने हड़ताल पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे अवैध बताया। हाईकोर्ट ने डॉक्टरों को तत्काल काम पर लौटने का आदेश दिया।

एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि हड़ताल पर बैठे सभी डॉक्टर तत्काल काम पर लौटे। डॉक्टर अस्पताल में मौजूद अंतिम मरीज का भी इलाज करें। हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि आगे से बिना अनुमति हड़ताल नहीं करें। भविष्य में टोकन स्ट्राइक को भी हाईकोर्ट ने अवैध बताया। याचिका जबलपुर के पूर्व पार्षद इंद्रजीत कुंवर पाल सिंह ने लगाई थी। जिस पर चीफ जस्टिस रवि मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई।

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चिकित्सक महासंघ भी अडिग 
मप्र शासकीय स्वशासी चिकित्सक महासंघ के मुख्य संयोजक डॉ राकेश मालवीय ने कहा कि पिछले 10 साल से अपने मुद्दों और परेशानियों को लेकर सरकार के पास जा रहे हैं। कभी-कभी तो सरकार के प्रतिनिधि वर्षों तक बात नहीं करते। जब हम आंदोलन करते हैं, तो वो बात करते हैं। हड़ताल खत्म कराने के लिए हर बार आश्वासन का झुनझुना पकड़ा देते हैं। आज फिर से डॉक्टर्स एकजुट हुए हैं। उद्देश्य यही है कि जब तक मांगों को लेकर आदेश जारी नहीं हो जाते, तब तक पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश पर उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश के संबंध में संगठन पदाधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई है। उन्होंने डॉक्टरी काम में अधिकारियों के दखल पर नाराजगी भी जताई।

हड़ताली डॉक्टर्स से बातचीत 
स्वास्थ्य मंत्री डॉ प्रभुराम चौधरी ने कहा कि सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। डॉक्टरों से बातचीत चल रही है। कई मुद्दों पर सहमति भी बनी है। एक-दो मुद्दे ऐसे हैं, जिन पर सहमति नहीं बन पाई है। डॉक्टरों से अनुरोध है कि स्ट्राइक कॉल ऑफ करें। वैसे भी ये मानवता से जुड़ा हुआ मामला है। समाज में भी डॉक्टरों को भगवान के रूप में मानते हैं। इसलिए उनको स्ट्राइक वापस लेना चाहिए।’

इससे पहले हड़ताल खत्म कराने के लिए मंगलवार रात करीब 8 बजे चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के आवास पर बैठक हुई। इसमें स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और चिकित्सक संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। करीब एक घंटे चली बैठक में कोई सहमति नहीं बन पाई।

15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर्स हड़ताल पर 
प्रदेश के 15 हजार से ज्यादा सरकारी डॉक्टर बुधवार से हड़ताल पर चले गए। हड़ताल का असर भोपाल और इंदौर समेत प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर दिखाई दे रहा है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज ज्यादा परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि प्रदेश के 12 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भर्ती 228 मरीजों के ऑपरेशन बुधवार को टाल दिए गए हैं। डॉक्टरों ने केंद्र सरकार के समान डीएसीपी (डायनामिक एश्योर्ड करियर प्रोसेस) योजना लागू करने समेत अपनी अन्य मांगों को पूरा करने की डिमांड की है।

समर्थन में उतरे जूनियर डॉक्टर
मध्यप्रदेश मेडिकल टीचर एसोसिएशन और चिकित्सक संघ के आह्वान पर जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन भी हड़ताल पर है। एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट डॉ विजेंद्र सिंह ने बताया कि इन मांगों को लेकर जनवरी-फरवरी में भी हड़ताल की गई थी। सरकार ने कमेटी बनाई थी, लेकिन मसौदे को आगे नहीं बढ़ाया। जेडीए की मांग स्टाइपेंड बढ़ाने की है। प्रदेश के जिला अस्पतालों में तैनात किए गए जूनियर डॉक्टरों के रहने की व्यवस्था नहीं की गई है। ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की मांग भी पेंडिंग है। प्रमोशन टाइम पर देना भी प्रमुख मांगों में शामिल है।