Dog Bite: अहिल्या नगरी इन्दौर में श्वान दंश का गंभीर संकट और बचाव के जीवन रक्षक उपाय

24

Dog Bite: अहिल्या नगरी इन्दौर में श्वान दंश का गंभीर संकट और बचाव के जीवन रक्षक उपाय

डॉ. तेज प्रकाश व्यास

इन्दौर नगर सहित सम्पूर्ण राष्ट्र के नागरिक हित (लोक हित) में श्वान दंश (डॉग बाइट) की विभीषिका से सुरक्षा, त्वरित प्राथमिक उपचार एवं प्रशासनिक उत्तरदायित्वों को रेखांकित करता हुआ व्यापक मार्गदर्शक विमर्श:
​1. इन्दौर की वर्तमान स्थिति एवं श्वान दंश का सांख्यिकीय संकट
​अहिल्या नगरी इन्दौर, जो अपनी स्वच्छता के लिए वैश्विक पटल पर कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है, वर्तमान में श्वान दंश (Dog Bite) के संकट से अत्यधिक संवेदनशील दौर से गुजर रही है। हालिया स्वास्थ्य आंकड़ों और स्थानीय चिकित्सालयों (जैसे महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय – MYH) की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में प्रतिदिन औसतन 100v से अधिक श्वान दंश के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि अनियंत्रित श्वानों की बढ़ती संख्या ने जनसामान्य में, विशेषकर बच्चों और वृद्धों में, एक भय का वातावरण निर्मित कर दिया है।
​इस विभीषिका से निपटने के लिए इन्दौर नगर निगम (IMC) ने ‘सिक्स-पॉइंट एक्शन प्लान’ (Six-Point Action Plan) तैयार किया है, जिसके अंतर्गत सम्पूर्ण नगर को ‘रेबीज मुक्त क्षेत्र’ बनाने का संकल्प लिया गया है। इस सांख्यिकीय संकट को केवल एक प्रशासनिक चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि जन-स्वास्थ्य के एक गंभीर आपातकाल के रूप में देखा जाना अनिवार्य है।
​2. श्वान दंश के तुरंत बाद अचूक प्राथमिक उपचार (First Aid Protocols)
​यदि दुर्भाग्यवश कोई व्यक्ति श्वान दंश का शिकार हो जाता है, तो रेबीज जैसे शत-प्रतिशत घातक वायरस को निष्प्रभावी करने के लिए तत्काल किया गया प्राथमिक उपचार ही जीवन रक्षक सिद्ध होता है।
​बहते पानी और साबुन से प्रक्षालन (Washing with Soap and Water)
​दंश के तुरंत बाद, बिना एक क्षण गंवाए, घाव को बहते हुए साफ पानी (Running Tap Water) के नीचे रखें। किसी भी सामान्य नहाने वाले साबुन, अथवा डेटॉल साबुन (Dettol Soap) का उपयोग करके घाव को कम से कम 15 मिनट तक लगातार अच्छी तरह धोएं। साबुन में मौजूद क्षारीय तत्व और झाग, श्वान की लार में उपस्थित रेबीज वायरस की बाहरी वसायुक्त परत (Lipid Envelope) को तोड़कर उसे नष्ट कर देते हैं।
​रासायनिक विसंक्रमण (Antiseptic Application)
​घाव को अच्छी तरह सुखाने के पश्चात उस पर डेटॉल लिक्विड (Dettol Application), पोविडोन-आयोडीन (Povidone-Iodine) या कोई भी उपलब्ध अल्कोहल-युक्त एंटीसेप्टिक प्रचुर मात्रा में लगाएं। यह बचे हुए सूक्ष्मजीवों को समाप्त करने में अत्यंत प्रभावी है।

 

​निषेध (What NOT to Do)
​घाव पर कभी भी मिर्च, हल्दी, मिट्टी, चूना या कोई भी पारंपरिक घरेलू लेप न लगाएं। इससे संक्रमण और अधिक गहरा हो जाता है। इसके अतिरिक्त, श्वान दंश के घाव पर तुरंत टांके (Sutures) नहीं लगवाए जाने चाहिए, जब तक कि अत्यधिक रक्तस्राव को रोकना अनिवार्य न हो। घाव को खुला छोड़ना ही उचित माना जाता है।

​3. अस्पताल में जीवन रक्षक चिकित्सा (Immediate Hospital Treatment)
​प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद पीड़ित को बिना किसी विलंब के निकटतम सरकारी या अधिकृत निजी चिकित्सालय पहुंचना चाहिए। रेबीज का कोई उपचार नहीं है, केवल बचाव ही एकमात्र उपाय है।
​एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV – Anti-Rabies Vaccine)
​आधुनिक चिकित्सा पद्धति के अनुसार, श्वान दंश की गंभीरता के आधार पर (विशेषकर जब त्वचा कट गई हो या रक्त निकला हो) एंटी-रेबीज वैक्सीन का कोर्स अनिवार्य रूप से प्रारंभ किया जाता है। यह टीके सामान्यतः 0, 3, 7, 14 और 28 वें दिन लगाए जाते हैं। केंद्र सरकार ने इसे आवश्यक दवाओं की सूची (Essential Drugs List) में सम्मिलित किया है, अतः यह शासकीय अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है।

​रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG – Rabies Immunoglobulin)
​यदि दंश अत्यधिक गहरा है (Category III Bite), तो केवल वैक्सीन पर्याप्त नहीं होती। ऐसी स्थिति में घाव के भीतर और उसके चारों ओर ‘रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन’ का इंजेक्शन दिया जाता है। यह शरीर में रेबीज के विरुद्ध तत्काल तैयार एंटीबॉडीज पहुंचाता है, जो वायरस को तंत्रिका तंत्र (Nervous System) तक पहुंचने से पहले ही रोक देती हैं।

​4. पैदल चलने वाले नागरिकों (Pedestrians) के लिए सुरक्षा सावधानियां
​मार्ग पर पैदल चलते समय श्वानों के अप्रत्याशित व्यवहार से बचने के लिए नागरिकों को अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए:

​शारीरिक भाषा (Body Language) का संयम: यदि कोई श्वान आपके समीप आकर भौंकने लगे, तो घबराकर भागें नहीं। दौड़ने से श्वान की प्राकृतिक शिकार प्रवृत्ति (Prey Drive) जाग्रत हो जाती है और वह पीछे दौड़ता है। ऐसी स्थिति में शांत खड़े रहें, अपने हाथों को बगल में सटा लें और श्वान से सीधे आंखें मिलाने (Direct Eye Contact) से बचें, क्योंकि श्वान इसे चुनौती मानते हैं।
​अचानक हलचल से बचाव: सोते हुए, भोजन करते हुए या अपने शावकों (Pups) के साथ बैठी कुतिया के समीप अचानक न जाएं और न ही उनके क्षेत्र में कोई उग्र हलचल करें।
​सुरक्षात्मक उपकरण: रात्रि में या एकांत मार्गों पर पैदल चलते समय अपने पास एक साधारण छड़ी (Walking Stick) या छाता अवश्य रखें। इसे श्वानों को मारने के लिए नहीं, बल्कि अपने और उनके बीच एक सुरक्षित दूरी (Barrier) बनाए रखने के लिए उपयोग करें।
​५. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश एवं स्थानीय प्रशासन का दायित्व
​श्वान दंश की रोकथाम और आवारा श्वानों के प्रबंधन को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने अत्यंत स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन करना इंदौर नगर निगम (IMC) और जिला प्रशासन के लिए वैधानिक रूप से अनिवार्य है:

WhatsApp Image 2026 06 11 at 04.35.10

 

WhatsApp Image 2026 06 11 at 08.14.53

​पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023; (ABC Rules 2023) का

कड़ाई से अनुपालन: सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार, स्थानीय निकायों को श्वानों को पकड़ने, उनका बंध्याकरण (Sterilization) करने, एंटी-रेबीज टीकाकरण करने और तत्पश्चात उन्हें पुनः उन्हीं के मूल क्षेत्र में छोड़ने की प्रक्रिया (Catch-Neuter-Vaccinate-Return) को पूरी पारदर्शिता और गति के साथ संचालित करना होगा।
​सार्वजनिक एवं संवेदनशील स्थानों से श्वानों का विस्थापन: सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक आदेशों (जैसे नवंबर २०२५ के निर्णय) के अनुसार, अत्यधिक जन-आवाजाही वाले सार्वजनिक संस्थानों जैसे — विद्यालयों (Schools), चिकित्सालयों (Hospitals), खेल परिसरों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के परिसर से आवारा श्वानों को अनिवार्य रूप से हटाया जाना चाहिए। इन क्षेत्रों से पकड़े गए श्वानों को बंध्याकरण के पश्चात वापस वहां नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें lनिगम द्वारा निर्मित ‘श्वान आश्रय स्थलों’ (Dog Shelters) में स्थानांतरित किया जाएगा।
​भोजन खिलाने के क्षेत्रों का निर्धारण (Designated Feeding Zones): स्थानीय प्रशासन को प्रत्येक वार्ड में श्वानों को भोजन खिलाने के लिए विशिष्ट स्थान (Feeding Zones) चिन्हित करने होंगे। सार्वजनिक मार्गों, शासकीय कार्यालयों के परिसरों या रिहायशी सोसायटियों के मुख्य द्वारों पर खुला भोजन डालना प्रतिबंधित है। पशु प्रेमियों को केवल निर्धारित क्षेत्रों में ही भोजन कराने की अनुमति होगी, और असुरक्षित या अनियंत्रित भोजन कराने पर उत्पन्न होने वाली विसंगतियों के लिए उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा।

​प्रशासनिक जवाबदेही: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि स्थानीय निकाय इन नियमों के क्रियान्वयन में शिथिलता बरतते हैं, तो यह सीधे तौर पर नागरिकों के ‘जीने के अधिकार’ (अनुच्छेद २१) का उल्लंघन माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना (Contempt) की कार्यवाही की जा सकती है। नगर निगम का यह परम कर्तव्य है कि वह शहर में ‘डॉग-कैचिंग वैन’ की संख्या बढ़ाए, कर्मचारियों को प्रशिक्षित करे और रेबीज रोधी टीकों का बफर स्टॉक सदैव बनाए रखे।
​यह मार्गदर्शिका न केवल इंदौर के गौरव को अक्षुण्ण रखने के लिए है, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के नगर निकायों के लिए एक आदर्श विमर्श प्रस्तुत करती है ताकि मनुष्य और पशु जनित सुरक्षा के मध्य एक संतुलित, सुरक्षित और रेबीज-मुक्त समाज की स्थापना की जा सके।

Newspaper Ink is Harmful: अखबार पर खाना खाना भी जानलेवा साबित हो सकता है