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Garadu Benefits: सर्दियों में इंदौर का एक खास व्यंजन गराडू

Garadu Benefits:  सर्दियों में इंदौर का एक खास व्यंजन गराडू

रूचि बागड़देव
       यदि कभी आप इंदौर में किसी शादी में गए हों या सर्दियों में चाट बाजार सराफा में कोइ शाम गुजारी हो तो गराडू के स्वाद और चाहने वालों का अंदाज आपको जरूर होगा | सर्द शाम और गरमा गर्म मसालेदार महकता गराडू एक एसा व्यंजन है जो एक बार आपने खा लिया तो दूसरी बार राह चलते आप गराडू का ठेला देखते ही स्वत रुक जायंगे चलो एक एक दोना चाट हो ही  जाय |यह इंदौर कि एक ख़ास चर्चित  चाट है पर लोग इसकी सब्जी भी स्वाद से खाते है तो सवाल यह उठता है कि आखिर गराडू में है क्या ?क्यों सर्दी का मौसम शुरू होते ही गरमा-गरम गराडू का मजा दुगुना हो जाता है|गराडू को ठंड का दुश्मन माना गया है यह मध्यप्रदेश में विशेषतौर पर इंदौर और उज्जैन में बहुत ही मशहूर है । इसका उपयोग सुबह नास्ते के रूप में गरमा गरम , कुरकुरे और चटपटे गराडू खाने को आनंद लिया जा सकता है मालवा  के लोग इसे पहले डीप फ्राय करके- कुरकुरा होने पर एक खास चाट मसाले जिसमें जीरावन, कालानमक और लाल मिर्च ऊपर से डालकर और नीबू निचोड़ कर अखबार वाले कागज में खाते हैं । गराडू सर्दियों में भरपूर ऊर्जा और गर्माहट देता है, भरपूर फाइबर पाचन शक्ति को बढ़ाकर ख़राब  कोलेस्टोल को कम करता है ।कहा जाता है इसे सीधे कढ़ाही से निकाल कर गर्म गर्म खाने से सर्दी चली जाती है
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गराडू सर्दियों में भरपूर ऊर्जा और गर्माहट देता है, भरपूर फाइबर पाचन शक्ति को बढ़ाकर बुरे कोलेस्टोल को कम करता है । इसके एंटी आॅक्सीडेंट विटामिन सी बुढ़ापे की प्रक्रिया को रोकते है और इससे इम्यूनिटी मजबूत होती है, भरपूत खनिज लवण जैसे लौह, कापर, कैल्शियम, पोटेशियम, मेंगनीज, फास्फोरस होने से हडिडयों को मजबूत करता है । ब्लड प्रेशर को कम कर दिल की सेहत को बनाए रखता है, त्वचा और बालों को सुन्दर बनाता है । उबले हुए गराडू को मैश कर शहद के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाने से झुर्रिया कम होती है और चेहरे पर निखार आता है|
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इसके साथ ही फाइबर आपके पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाता है और कब्ज में लाभदायक होता है। गराडू  कॉपर आयरन कैल्शियम पोटेशियम मेंगनीज फॉस्फोरस के साथ ही कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो आपके स्वास्थ्य और सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।इसमें विटामिन्स के साथ-साथ एंटी ऑक्सीडेंट भी भरपूर होते हैं जो न सिर्फ मानसिक तनाव को कम करते हैं बल्कि आापको जवां  दिखने में भी मदद करता हैं।रोग प्रतिराधक क्षमता को बढ़ाने के लिए भी गराडू मददगार होता है ,इसको तलते वक्त एक खास सुगंध भुख को जगाती है |
यदि आप घर पर इसकी चाट बना रहे है तो इसे बनाने के लिए: गराडू को कुकर में १० मिनट उबाल लें. ठंडा होने पर इसके छिलके निकाल लें .ध्यान रहे की स्टार्च होने के कारण छिलके निकालते समय हाथ चिपचिपे हो सकते हैं; छिलके निकालने के बाद इसके छोटे टुकड़े काट लें और तेल में कुरकुरा और भूरा होने तक तल लीजिये ..ऊपर से जीरवन कला नमक और लाल मिर्च पाउडर को बुरक लीजिये चाट तैयार है |किन्तु दूसरी विधि ज्यादा उपयुक्त है इसके लिए आप गराडू को छिल कर तेल का हाथ लगाकर इसके बड़े बड़े तुकडे इडली कुकर में जाली पर रख कर भाप में पका लीजिये फिर ठन्डे होने पर गहरे गर्म तेल में सुनहरा होने तक तल लीजिये |इस पर  नीबू का रस : 2 चम्मच; नमक : स्वादानुसार; जिरालू मसाला : 2 चम्मच लेकर बुरक कर सर्व करिए |चाट को चटनी के साथ भी खाया जा सकता है |
                             गराडू एक तरह की जड़ है जो जिमीकंद या रतालू ,या ग्न्थालू ,सुरन प्रजाति  का पौधा है |गराडू एक जड़ फसल है जो अपने कंदों के लिए पूरी दुनिया में बड़े पैमाने पर उगाई जाती है। कार्बोहायड्रेट का. यह एक उम्दा स्रोत है। गराडू की खेती  बलुई दोम्मट मिटटी , जिसमे पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था होआसानी से की जा सकती है  गराडू की बुआइ बेड बनाकर फिर ड्रिप डाल कर केरे बुवाई मई जून में करे । बीज की मात्रा प्रति एकड़ 14 से 18 किवंटल रखे । खेत की तयारी : बुआई के । दो दिन पहले 200 किलो सुपर फॉस्फेट 100 किलो यूरिया व् 300 किलो पोटाश प्रति एकड़ के मान से डाले । फिर बुआई केर पैदावार : 60 से 80 किवंटल प्रति एकड़ के मान से होगी । इस बारे में तेज एग्री ग्रुप के कृषि सलाकार तेजराम नागर ने बताया की गराडू मूल रूप से कन्द की फसल है और ये सबी प्रकार।की मिट्टी मे ऊगा सकता है यदि किसान  गराडू को अपनाए तो अच्छा लाभ कमा सकते है|
 भारतीय खाने में कंद मूल का अपना एक अलग ही महत्व है फाइबर से भरपूर गराडू के चाट के लिए तले टुकड़ों को प्याज टमाटर के साथ अदरक हरीमिर्च के मसालेदार ग्रेवी में डाल कर   सब्जी के रूप में भी तंदूरी रोटी के साथ सर्व किया जाता है |  कई बार यह चावल के साथ भी पसंद कि जाती है |
इसकी खास बात यह है कि यह एकएसी सब्जी है जिसे कई दिनों तक आलू की  तरह    रखा जा सकता है यह कंद ख़राब नहीं होता ,इसलिए जब कोई सब्जी उपलब्ध ना हो आप इसकी सब्जी बना सकते है |     गराडू कॉपर, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मेंगनीज, फॉस्फोरस के अलावा कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है जो आपके स्वास्थ्य और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।    गराडू में भरपूर ऊर्जा और गर्माहट होती है और साथ में बहुत सारे फायबर, विटामिन्स और ख़निज लवण पाए जाते है जोकि बहुत फायदेमंद है । गराडू आदि सब्जियों में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है  |  शायद मालवा की ठंडी रातों में  गराडू के स्वाद और फायदों  को देख कर ही   इसे विशेष रूप से खाया जाता है |  खानेपीने और चाट पकोड़े वाले  देश भारत में – “जंहा घाट-घाट में पानी बदले , बीस कोस में बानी ” की कहावत चरितार्थ हो, वंहा हर कोस पर स्वाद के मायने और ढंग बदलते है  तो शबे मालवा   का गराडू भी एक सेहत से भरपूर का व्यंजन है खाया हो तो दुबारा खाएं ना खाया हो तो खा कर बताएं |
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रूचि बागड़देव,हैदराबाद