Left a Mark of Innovation : रतलाम में “कविताई” ने बिखेरी शब्दों की शान, गुलाब चक्कर में सजा साहित्यिक संगम!

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Left a Mark of Innovation : रतलाम में “कविताई” ने बिखेरी शब्दों की शान, गुलाब चक्कर में सजा साहित्यिक संगम!

संस्था ने सभी कवियों को मोमेंटो देकर किया सम्मानित, नवाचार की छाप छोड़ गया आयोजन!

Ratlam : शहर के नवश्रृंगारीत ऐतिहासिक गुलाब चक्कर में शुक्रवार को आयोजित “कविताई- शब्दों की शान” के नाम रही। गुलाब चक्कर में आयोजित इस साहित्यिक संगम में नए-नए रचनाकारों ने अपनी भावनाओं, संवेदनाओं और विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में देशभक्ति, मातृ-प्रेम, पिता के संघर्ष और नारी शक्ति जैसे विषयों पर कवियों ने दिल छू लेने वाली प्रस्तुतियां दीं।

कविताओं में ढली भावनाएं!

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। जैसे ही कविताई का दीप जला, हर दिल भावों से भर चला। मंच से कहीं देशभक्ति का स्वर गूंजा तो कहीं मां की ममता ने मन छू लिया। पिता के संघर्ष की गाथा ने आंखों में आदर का दीप जला दिया। नारी की महिमा जब मंच पर उतरी, शब्द नहीं मानों शक्ति स्वयं बोल उठी।

इन कवियों ने बांधा समां!

कविताई के मंच को सुशोभित किया डॉ. खुशबू राठी, डॉ. सुनीता जैन, मदन मस्ताना और राजेंद्र शर्मा ने। सभी रचनाकारों ने अपनी-अपनी प्रतिभा का स्वर्णिम परिचय देते हुए शब्दों से मन संवारा। कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों को स्मृति चिन्ह- मोमेंटो भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन संयोजक नित्येंद्र एम. आचार्य रहे।

आयोजन में राकेश बोरिया, सुनील निरंजनी, हितेंद्र प्रताप सिंह एवं गणराज भूषण की विशेष भूमिका रही। आयोजकों ने बताया कि गुलाब चक्कर में आयोजित यह एक नवाचार था, जिसका उद्देश्य रतलाम के नए-नए रचनाकारों को मंच देना था। कविताई केवल आयोजन न था, यह आत्माओं का संगम था। रतलाम की यह शाम लंबे समय तक याद रहेगी। संचालन वरिष्ठ सेवानिवृत्त प्राचार्य नरेंद्र त्रिवेदी एवं नित्येंद्र एम आचार्य ने किया!