क्लीन इमेज वाले नेताओं को ही निगम-मंडल, प्राधिकरणों में मिलेगी नियुक्ति, पुलिस की मदद से नेताओं का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड

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क्लीन इमेज वाले नेताओं को ही निगम-मंडल, प्राधिकरणों में मिलेगी नियुक्ति, पुलिस की मदद से नेताओं का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड

भोपाल: प्रदेश में निगम-मंडल और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर हो रही देरी के पीछे सरकार का फूंक-फूंक कर कदम रखना माना जा रहा है। नियुक्तियों को लेकर दिल्ली से हरी झंडी मिल चुकी है और अब कभी भी इनके नामों की घोषणा हो सकती है। सिफारिश और राजनीतिक समीकरण अपनी जगह कायम हैं, लेकिन गुपचुप रूप से पुलिस की मदद से नेताओं का रिकॉर्ड खंगाला गया। पुलिस के सहयोग से सरकार ने 50 के करीब नेताओं के नामों को लेकर पुलिस स्तर पर इनपुट जुटाए गए। जिनमें उनके आपराधिक रिकॉर्ड, दर्ज मामलों की प्रकृति और चाल-चरित्र की जानकारी खंगाली गई।

सूत्रों के मुताबिक शुरूआती चरण में नियुक्तियों को लेकर नाम सत्ता और संगठन की सहमति के बाद दिल्ली केंद्रीय संगठन को भेज दिए गए थे, लेकिन वहां से सूची यह कहकर वापस कर दी गई कि हर नाम के साथ उसका पूरा बैकग्राउंड प्रोफाइल भी दिया जाए। खास तौर पर यह स्पष्ट करने को कहा गया कि यदि किसी नाम पर आपराधिक मामला दर्ज है, तो उसकी प्रकृति क्या है और संबंधित व्यक्ति की छवि कैसी मानी जाती है।

दिल्ली के इस निर्देश के बाद जो नाम भेजे गए थे। उनका विभिन्न माध्यमों से इनपुट जुटाने का काम शुरू हुआ। खासतौर पर पुलिस की इसमें मदद ली गई। दिल्ली भेजे गए एक-एक नाम की जानकारी जुटाई गई। इसके आधार पर संशोधित लिस्ट तैयार की गई और फिर से दिल्ली भेजी गई। दरअसल यह इस पूरी कवायद का मकसद साफ छवि वाले चेहरों को प्राथमिकता देना है। ताकि नियुक्तियों को लेकर बाद में किसी तरह का विवाद खड़ा न हो।

इन निगम, मंडल और प्राधिकरणों में तय हुआ नाम

सूत्रों की मानी जाए तो भोपाल, इंदौर,जबलपुर और देवास के प्राधिकरणों में अध्यक्ष के नाम तय हो चुके हैं। जबकि ग्वालियर, उज्जैन, कटनी और ओरछा विकास प्राधिकरण के लिए नाम तय होना बाकी है। इसी तरह अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, युवा आयोग, लघु उद्योग निगम, मध्यप्रदेश वेयर हाउसिंग कॉपोर्रेशन , वित्त विकास निगम, खेल प्राधिकरण में नियुक्तियों के लिए नाम तय हो चुके हैं।

संगठन भी ले रहा सबक

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से मिले इस संकेत के बाद भविष्य में संगठनात्मक नियुक्तियों में भी इसी तरह की सावधानी बरती जा सकती है। यानी नए चेहरे को पद देने से पहले उनके संबां में फीडबैक जुटाने की प्रक्रिया इसी तरह से हो सकती है। ताकि पिछले कुछ मोर्चा की कार्यकारिणी में उठे विवादों की पुनरावृत्ति न हो।