
Simhasth 2028: करीब 40 करोड़ श्रद्धालु आएंगे, हर दिन 4 करोड़ श्रद्धालु कर सकेंगे अमृत स्नान, शिप्रा नदी पर 853 करोड़ रूपए से 22 नए पुलों का निर्माण- CM डॉ यादव
उज्जैन और करीबी जिलों में चल रहे हैं 25 हजार करोड़ के विकास कार्य- ‘सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प’ पर हुई वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सहभागिता
उज्जैन । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हर 12 साल में होने वाला सिंहस्थ भारत का ही नहीं, विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। यह हमारी अपनी समृद्ध भारतीय संस्कृति, दर्शन, पीढ़ियों से चली आ रही विरासत, अटूट आस्था और हमारी आध्यात्मिक परम्पराओं का महासंगम है। इस धार्मिक उत्सव में मां शिप्रा के जल में स्नान करने से मोक्ष प्राप्त होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सिंहस्थ : 2028 को नव्य प्रारूप में भव्य, दिव्य और आध्यात्मिक बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। इसके लिए हमारी सभी तरह के प्रबंधन एवं तैयारियां तेजी से जारी हैं। हम सब मिलकर पूरी निष्ठा, लगन और समर्पण से काम करेंगे, तभी सिंहस्थ : 2028 एक नई मिसाल कायम करेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को उज्जैन में ‘सिंहस्थ-2016 के अनुभव, 2028 का संकल्प’ विषय पर हुई एक वृहद प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का विधिवत् शुभारंभ किया। कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ : 2028 के महाआयोजन से जुड़े सभी प्रशासनिक, पुलिस, स्वास्थ्य, नगर निगम और अन्य निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों एवं अन्य जनों से कहा कि सिंहस्थ केवल एक मेला नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बिन्दु है। यह हमारी परम्पराओं, विरासत का भव्य प्रतीक है। इसकी गरिमा बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। इसीलिए अधिकारी-कर्मचारी-स्वयंसेवी संगठन-जनप्रतिनिधि सभी लोग एक टीम की तरह सेवा भावना से कार्य करें, क्योंकि टीम वर्क ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ सिंहस्थ, स्वस्थ सिंहस्थ ही हमारा संकल्प है। सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और त्वरित राहत व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उज्जैन और इसके आस-पास के सभी जिलों में वर्तमान में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक की लागत के विभिन्न श्रेणी के कई विकास कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों के पूरा होने पर उज्जयिनी सम्राट विक्रमादित्य के काल का वैभव पुन: प्राप्त कर धार्मिक, आध्यात्मिक और आर्थिक समृद्धि का एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ : 2028 के दौरान करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का उज्जैन आने का अनुमान है। शिप्रा के नवीन घाटों और मौजूदा घाटों पर 24 घंटे में लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु अमृत स्नान कर सकेंगे। सभी श्रद्धालु मां शिप्रा के जल से ही स्नान कर सकें, इसके लिए हमारी सरकार हर तरह के प्रबंध कर रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत बदल रहा है। देशभर में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिली है। विरासत से विकास का अनुष्ठान चल रहा है। हमारी धार्मिक और ऐतिहासिक नगरियां देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को लालायित कर रही हैं। उज्जैन काल और महाकाल की नगरी है। सौभाग्यशाली लोगों को ही उज्जैन आने का अवसर मिलता है। सिंहस्थ 2028 के भव्य और दिव्य आयोजन के लिए उज्जैन में दूरगामी दृष्टि के साथ अधोसंरचना विकास के कार्य जारी हैं। यहां किए जा रहे कार्य परमात्मा के आशीर्वाद से हो रहे हैं। सिंहस्थ के सफल आयोजन के लिए हर बार पिछली चुनौतियों को लेकर मंथन हुआ है। यह कार्यशाला भी इसी उद्देश्य के लिए आयोजित की गई है।
सिंहस्थ : 2028 के लिए समितियों का होगा गठन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 1980 के सिंहस्थ में उन्होंने स्वयं भी स्काउट एंड गाइड वॉलेंटियर के रूप में श्रद्धालुओं की सेवा की थी। वर्ष 1992 में सिंहस्थ समिति की बैठकों में शामिल होने का अवसर भी मिला। सिंहस्थ समितियों में हर वर्ग के अनुभवी लोगों को शामिल कर उनके सुझाव लिए जाते हैं। आगामी सिंहस्थ के लिए सभी समितियों का गठन होना है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का सिंहस्थ है। पहले के सिंहस्थ में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था कराने की चुनौती थी। लेकिन वर्ष 2022 के बाद उज्जैन शहर में होटल निर्माण, सड़क चौड़ीकरण और अधोसंरचना विकास के अनेक कार्य शुरू हुए। श्रद्धालुओं के सुविधाजनक आवागमन के लिए अब कोई सड़क ऐसी नहीं बच रही है, जिसे चौड़ा न किया गया हो। शिप्रा नदी पर घाटों का निर्माण कार्य जारी है। सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी जल परियोजना शिप्रा में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। राज्य सरकार ने देवस्थानों पर सुविधाएं विकसित करने का काम कर रही है। शिप्रा में पक्के घाटों के निर्माण से मिट्टी का कटाव थमेगा, साथ ही नदी की धारा अविरल और एक जैसी बनी रहेगी।
विकसित की जा रही है बेहतर रोड कनेक्टिविटी
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन आने-जाने के लिए आसपास के सभी शहरों तक बेहतर रोड कनेक्टिविटी विकसित की जा रही है। पड़ोसी राज्यों से भी चर्चा कर श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे। दूसरी ओर रेलवे लाइन के विकास कार्य भी आवागमन के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब फतेहाबाद का ट्रैक चालू हो गया है और नागदा जाने के लिए रेलगाड़ियों को अब उज्जैन आने की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री और केन्द्रीय रेल मंत्री ने उज्जैन में एक नए रेलवे स्टेशन की सौगात दी है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि इस कार्यशाला के जरिए पिछले सिंहस्थ आयोजनों में उज्जैन में सेवाएं दे चुके सभी अनुभवी अधिकारियों और नागरिकों से जो भी सुझाव मिलेंगे, हम उन सुझावों पर बेहतर अमल कर सिंहस्थ : 2028 का सफल आयोजन सुनिश्चित करेंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यशाला में सिंहस्थ 2028 को लेकर की जा रही तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को पर्याप्त, सुरक्षित एवं सुविधाजनक स्नान स्थल उपलब्ध कराने के लिए 778 करोड़ रुपए की लागत से मां शिप्रा के दोनों तटों पर 29 किमी से अधिक लंबाई के नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही 120 करोड़ रुपए राशि से मौजूदा 7.8 किमी के स्थायी घाटों का उन्नयन किया जा रहा है। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए उज्जैन को सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जोड़ा जा रहा है। उज्जैन की चारों दिशाओं में 6 लेन 4 लेन सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। करीब 1692 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-इंदौर 6 लेन रोड तो लगभग पूर्ण हो गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन और आंतरिक मार्गों पर यातायात अवरुद्ध ना हो इसके लिए 853.46 करोड़ रुपए राशि से 22 नवीन पुलों का निर्माण एवं वर्तमान पुलों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। 17 पुल नदी पर और 5 रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण प्रगतिरत है। सिंहस्थ के दौरान रियल टाइम निगरानी, भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए केंद्रीय डिजिटल कमांड सेंटर का विकास 139 करोड़ रुपए राशि से किया जा रहा है। सेंटर में शहर और मेला क्षेत्र की एकीकृत सीसीटीवी निगरानी, एआई आधारित भीड़ प्रबंधन आदि की सुविधा रहेगी। सिंहस्थ को सुरक्षित बनाने के लिए एकीकृत आपदा प्रबन्धन, मानव संसाधन प्रशिक्षण और अग्नि सुरक्षा प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 5,017 करोड़ रुपए से उज्जैन-जावरा मार्ग एवं 2,935 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग, 2,523 करोड़ रुपए की लागत से उज्जैन-झालावाड़ 2 लेन से फोरलेन, 351 करोड़ रुपए से उज्जैन-मक्सी 2 लेन से फोरलेन, 2,660 करोड़ रुपए से उज्जैन-गरोठ मार्ग, 7.02 करोड़ रुपए से सिंहस्थ बाईपास निर्माण कर श्रद्धालुओं का आवागमन सुगम बनाया जाएगा। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुगम और निर्बाध रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 236 स्पेशल ट्रेन चलाई जाएगी। इसके साथ ही 7 रेलवे स्टेशन उज्जैन, नई खेड़ी, चिंतामन, पंवासा, मोहनपुरा, पिंगलेश्वर और विक्रम नगर का उन्नयन एवं आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंहस्थ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुगम कनेक्टिविटी के लिए उज्जैन-देवास रोड पर करीब 457 एकड़ भूमि पर नवीन हवाई अड्डे का निर्माण किया जा रहा है। करीब 13.45 करोड़ रुपए से सदावल में 4 आधुनिक हेलीपैड का निर्माण किया जा रहा है।
संभागायुक्त एवं मेला अधिकारी श्री आशीष सिंह ने कार्यशाला में स्वागत भाषण देते हुए सिंहस्थ 2028 की तैयारीयों के संबंध में पावर पाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से विस्तार पूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिंहस्थ महापर्व 2028 के अंतर्गत लगभग 40 करोड़ श्रदालुओं के आने की संभावना है। श्रदालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विभागों के अंतर्गत 25 हजार करोड़ रूपए के विकास कार्य किए जा रहे हैं। उज्जैन की कनेक्टीविटी बढ़ाने के लिए सड़क मार्ग और रेल मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
सिंहस्थ के दौरान 236 विशेष ट्रेंने चलाई जाएंगी । सदावल में 04 नए हेलिपेड़ तैयार किए जा रहे हैं। रीयल टाईम निगरानी के लिए इंट्रीग्रेंटेड कमांड एडं कंट्रोल सिस्टम बनाया जाएगा । बाहर से आने वाले वाहनों के लिए 03 हजार हेक्टेयर में नये पार्किग क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं जिनमें कुल 30 पार्किग सेक्टर बनाये जाएगें। सिंहस्थ मेला क्षेत्र 3054 हेक्टेयर में लगाया जाएगा । इसमें 07 झोन और 19 सेक्टर बनाये जाएंगे। इसका लेआउट जीआईएस पर तैयार किया जा रहा है । उज्जैन शहर में पेयजल आपूर्ति के अंतर्गत जल आर्वधन योजना 1133 करोड़ रूपए की लागत से संचालित की जा रही है।
मेला अधिकारी श्री सिंह ने बताया कि इस बार का सिंहस्थ शून्य वेस्ट आयोजन होगा। सिंहस्थ का आयोजन अनादिकाल से किया जा रहा है। बदलते समय के साथ-साथ इसके आयोजन में काफी बदलाव आए हैं । सिंहस्थ 2028 कि तैयारियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में वर्ष 2024 से ही प्रारंभ कर दी गई थीं। हमारा प्रयास यह रहेगा की सिंहस्थ 2028 को अविस्मरणीय आयोजन बनाएंगे।
सिंहस्थ 2028 के आयोजन को और बेहतर बनाने के लिए यहां पूर्व के सिंहस्थ में अपनी सेवाएं दे चुके वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीयों में सिंहस्थ 2016 में संभागायुक्त रहे डॉ. रविंद्र पस्तोर, कलेक्टर रहे श्री कविंद्र कियावत, पुलिस अधिक्षक रहे श्री मनोहर सिंह वर्मा तथा सभी विभागों के अधिकारी जिन्होंने सिंहस्थ 2016 और उसके पूर्व के सिंहस्थ में अपनी सेवाएं दी, उन्होंने अपने सुझाव दिए। सुझावों के आधार पर आगामी कार्ययोजना को मूर्त रूप दिया जाएगा।
कार्यशााला मे सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए अधोसंरचना विकास के कार्यो पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया । कार्यशाला में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और झोनल अधिकारी व सेक्टर अधिकारीयों द्वारा पूर्व के सिंहस्थ आयोजन के अपने अनुभव भी साझा किए गए और आगामी सिंहस्थ महापर्व 2028 को और बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव भी दिए गए।
कार्यशाला में विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, श्री संजय अग्रवाल, उज्जैन विकास प्राधिकरण अध्यक्ष श्री रवि सोलंकी, एडीजी श्री राकेश गुप्ता, डीआईजी श्री नवनीत भसीन, कलेक्टर श्री रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, एडीएम श्री अत्येंद्र सिंह गुर्जर, नगर निगम आयुक्त श्री अभिलाष मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत श्री श्रेयांस कूमट, प्रशासक श्री महाकालेश्वर प्रबंध समिति श्री प्रथम कौशिक एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के जिला और संभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
कार्यशाला का संचालन श्रीमती प्रज्ञा गीते ने किया और आभार प्रदर्शन एडीजी श्री राकेश गुप्ता ने किया।





