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Saurabh Sharma Case : सौरभ की काली कमाई किस किस रिश्तेदार में बंटी, जांच एजेंसियों ने खुलासा किया

जिस प्लॉट पर सोने से भरी कार मिली, वह ही सौरभ के परिवार की!

Saurabh Sharma Case : सौरभ की काली कमाई किस किस रिश्तेदार में बंटी, जांच एजेंसियों ने खुलासा किया!

Bhopal : आरटीओ के पूर्व कांस्टेबल सौरभ शर्मा की काली कमाई की जांच के दौरान एजेंसियों को नया खुलासा हुआ। उसके रिश्तेदारों, परिचितों और राजदारों के ठिकानों की जांच में कई नई जानकारियां सामने आई। 19 दिसंबर को सुबह एक ओर सौरभ के अरेरा कॉलोनी स्थित घर और दफ्तर में लोकायुक्त दबिश दे रही थी, उसी समय राजदार काली कमाई को ठिकाने लगाने की साजिश रच रहे थे। चेतन गौर की कार में 52 किलो सोना और 11 करोड़ नकदी रखकर मेंडोरी के जंगल में पहुंचा दी गई। मेंडोरी में जिस प्लॉट पर कार खड़ी की, वह भी सौरभ के रिश्तेदार का था। इस प्लॉट का मालिक सौरभ की मां उमा शर्मा की बहन का दामाद है।

उमा की बहनें ग्वालियर में ही रहती हैं। दामाद ने कुछ समय पहले ही यह प्लॉट खरीदा था। जांच एजेंसियां को आशंका है कि इस खरीदी में भी सौरभ की काली कमाई लगी है। भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में ईडी की दबिश के बाद यह भी साफ हुआ कि जहां-जहां सौरभ के रिश्तेदार हैं, वहां काला धन खपाया गया।

सौरभ और चेतन की दोस्ती कैसे
सौरभ शर्मा ग्वालियर का रहने वाला है। 47 विनयनगर (बहोडापुर) सेक्टर-2 में उसका घर है। यहां से ईडी को कई संपत्तियों के दस्तावेज मिले। मां उमा और सौरभ के ज्वॉइंट बैंक खाते और लॉकर फ्रीज किए। जबकि, उसका पार्टनर चेतन सिंह गौर भिंड का है। बाद में वह ग्वालियर में लक्कडख़ाना स्थित गौर का बाड़ा में रहने लगा और सौरभ से उसकी दोस्ती हो गई। सौरभ ने अपनी अविरल कंस्ट्रक्शन कंपनी में उसे डायरेक्टर बनाया। इसके दस्तावेज भी ईडी को मिले हैं।

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भोपाल में कहां-कहां दबिश
चेतन, सौरभ, उमा शर्मा और शरद जायसवाल के यहां लोकायुक्त, आयकर और ईडी ने दबिश दी थी। 234 किलो चांदी की सिल्लियों के साथ करीब 8 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई। दस्तावेजों में करोड़ों के लेन-देन और एक ही कंपनी अविरल कंस्ट्रक्शन में चेतन गौर, शरद जायसवाल, रोहित तिवारी डायरेक्टर मिले। सौरभ की मां उमा के नाम से अलग निर्माणाधीन बंगला भी मिला है। रोहित तिवारी जबलपुर के शास्त्री नगर में रहता हैं। वह भी बिल्डर हैं और उसे सौरभ का साला बताया गया है।

नकद में निवेश का पता चला
ईडी की दबिश में कई दस्तावेजों से सौरभ के निवेश का पता चला। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में बिल्डरों के 52 ठिकानों पर आयकर की छापेमारी के बाद विभाग ने जिम्मेदारों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। बिल्डरों से प्रॉपर्टी खरीदने और नकद में लेनदेन करने वालों को विभाग ने अपनी जांच में ले लिया। छापे के दौरान बिल्डर, उनके प्रॉपर्टी पार्टनर, एसोसिएट्स, कर्मचारी आदि के जो नाम सामने आए है।
इसके अलावा कई रिटायर्ड आइएएस, बिजनेसमैन भी इस कांड में शामिल हैं। उन्होंने रातीबड़-नीलबड़, मेंडोरा-मेंडोरी की ओर काफी जमीन खरीदी। इसमें प्रॉपर्टी की ज्यादातर खरीद नकद में कई गई। इसमें बिल्डरों ने जमकर राजस्व का नुकसान पहुंचाया। विभाग ने ऐसे अफसरों की भी कुंडली बनाई और उन्हें नोटिस भेजना शुरू कर दिया। विभाग उनसे पूछताछ कर टैक्स चोरी की जानकारी भी पता करेगा।

तीन शहरों के कई ठिकानों पर दबिश
भोपाल में बिल्डरों के 49 तो इंदौर में एक और ग्वालियर में दो ठिकानों पर आयकर ने 19 दिसंबर को दबिश दी थी। इसमें 10 करोड़ रुपए नकद और 24 से अधिक बैंक लॉकर, जेवरात, प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले थे। हर दिन जांच के बाद एजेंसियों के हाथ नए तथ्य लग रहे हैं। मेंडोरी के जंगल में 19 दिसंबर को जिस कार से 52 किलो सोना और 11 करोड़ नकद मिले थे, उसके मालिक चेतन सिंह गौर ने आयकर और जांच एजेंसियों को लिए अपना बयान दे दिया है।