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‘कर्नल सोफिया’ मामले में ‘विजय’ की तरफ बढ़ रहे ‘शाह’…

‘कर्नल सोफिया’ मामले में ‘विजय’ की तरफ बढ़ रहे ‘शाह’…

कौशल किशोर चतुर्वेदी

कर्नल सोफिया पर विवादित बयान के मामले में अब तक जो लग रहा था कि विजय शाह पर कड़ी कार्यवाही तय है, उसकी संभावनाएं अब धूमिल सी लगने लगी हैं। लगता है कि अंतत: शाह का बार-बार का माफीनामा कुबूल हो जाएगा। जून का पूरा महीना शाह के हिस्से में है। हो सकता है कि इस बीच वह बहन कर्नल सोफिया से रूबरू होकर भी माफी मांग लें और तब सुप्रीम कोर्ट को भी यह अहसास कराना मुमकिन हो जाएगा कि आंसू मगरमच्छ के नहीं हैं, शाह के हैं। शाह की वह शाब्दिक भूल ही मानी जाए और माफीनामा भी दिल से कुबूल किया जाए। जिस तरह समय आगे खिसक रहा है, उसमें शाह के विजय की तरफ आहिस्ता-आहिस्ता एक-एक कदम आगे बढ़ रहे हैं। 11 मई को दिए गए बयान के पचास दिन जून माह में पूरे हो जाएंगे। और सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक सौ दिन पार हो जाएं, तो कोई बड़ी बात नहीं है। ऐसे में विजय की तरफ बढ़ते सौ कदम शाह की नैया पार लगाने के लिए काफी हैं। फिलहाल की तस्वीर यही कुछ बयां कर रही है। आगे जो होगा, सो देखने-सुनने, गुनने और समझने को सबके सामने आ ही जाएगा। पर यह तय है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजधानी भोपाल में आयोजित होने वाले महिला सशक्तिकरण सम्मेलन से पहले किसी तरह की अनहोनी से शाह को फिलहाल पूरी तरह से राहत मिल गई है। यह उनकी बड़ी जीत मानी जा सकती है।

जान लेते हैं कि मंत्री विजय शाह के मामले में 28 मई को सुप्रीम ककोर्ट की सुनवाई में क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी से विवादों में घिरे मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह के मामले की सुनवाई हुई। जस्टिस जेजे सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने मामला सुना। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि एसआईटी ने 21 मई को जांच की, वो बयान देने वाली जगह गई थी। मोबाइल समेत कुछ सबूत भी इकट्ठा किए गए। गवाहों के बयान लिए गए। जांच अभी शुरुआती चरण में है। हाईकोर्ट से हमारी रिक्वेस्ट है कि वो हमारे साथ-साथ सुनवाई न करे। एसआईटी ने तय तारीख को जांच रिपोर्ट पेश कर दी। एसआईटी ने कुछ और समय मांगा है। इस मामले की सुनवाई अब जुलाई के पहले हफ्ते में होगी। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन 19 मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही हुआ था। इसमें आईजी सागर रेंज प्रमोद वर्मा, डीआईजी कल्याण चक्रवर्ती और एसपी डिंडौरी वाहिनी सिंह शामिल हैं। चौंकाने वाली कोई बात नहीं है कि एसआईटी ने 6 दिन जांच की, लेकिन मंत्री विजय शाह से अभी तक कोई पूछताछ नहीं की गई। और जैसा कि आशंका आम आदमी को थी, वह धीरे-धीरे कानूनी दायरे में सच साबित होती लग रही है। मंत्री का वीडियो में रिकॉर्ड बयान ही बड़ा सबूत है। उन्होंने माफी मांगने का तीसरा वीडियो जारी कर ये भी साबित कर दिया कि उनका बयान आपत्तिजनक था। एसआईटी ने 11 मई को महू के रायकुंडा गांव में हुए हलमा कार्यक्रम के मंच पर मौजूद लोगों के बयान भी अपनी रिपोर्ट में दर्ज किए हैं। यहीं विजय शाह ने कर्नल कुरैशी को आतंकियों की बहन बताया था।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि एसआईटी का गठन होने के बावजूद जांच में देरी की जा रही है। जांच एजेंसियों पर दबाव बनाकर बीजेपी गवाहों को पलटना चाहती है। भाजपा सरकार और जांच अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के साथ आंख मिचोली खेल रहे हैं। देश भर में देखने को मिल रहा है कि भाजपा सरकार ईडी-आईटी के बल पर अपने नेताओं को बचाना चाहती है।

तो अब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार अपने पदीय और दलीय कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी से करते रहें। पर यह साफ हो गया है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 14 मई को शाह के बयान पर नोटिस लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश पर उनके खिलाफ इंदौर के मानपुर थाने में एमआरआई दर्ज की गई थी। इसके खिलाफ शाह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की रिपोर्ट की कॉपी इस केस के सुप्रीम कोर्ट में इंटर विनर व कांग्रेस नेता जय ठाकुर के वकीलों को उपलब्ध नहीं कराई गई है। वकील इस पर आपत्ति दर्ज कराएंगे। और यही आपत्तियां विजय शाह को इस जंजाल से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाने वाली हैं। मंत्री विजय शाह ने 11 मई को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कहा था, ‘उन्होंने कपड़े उतार-उतार कर हमारे हिंदुओं को मारा और मोदी जी ने उनकी बहन को उनकी ऐसी की तैसी करने उनके घर भेजा।’ शाह ने आगे कहा, ‘अब मोदी जी कपड़े तो उतार नहीं सकते। इसलिए उनकी समाज की बहन को भेजा…कि तुमने हमारी बहनों को विधवा किया है, तो तुम्हारे समाज की बहन आकर तुम्हें नंगा करके छोड़ेगी। देश का मान-सम्मान और हमारी बहनों के सुहाग का बदला तुम्हारी जाति, समाज की बहनों को पाकिस्तान भेजकर ले सकते हैं।’

तो आज की शाही और छोटी सी बात यही है कि शाह को अब तनावमुक्त रहकर कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान के मामले में विजय का वरण करने के लिए बड़ा वक्त मिल गया है। और इस वक्त का दो सौ फीसदी लाभ यही है कि अब कर्नल सोफिया कुरैशी के मामले में शाह जीवनदान पाने के हकदार बन जाएंगे। और ‘अंत भला सो सब भला’ की तर्ज पर शाह की यह विजय हो सकता है कि उन्हें बड़ी सीख देकर उनका आगे का जीवन कंटकमुक्त और संकटमुक्त बनाने में सफल हो…।