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CID में जांच की सुस्त चाल, कुल चल रही जांचों में आधी 5 साल से जारी

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CID में जांच की सुस्त चाल, कुल चल रही जांचों में आधी 5 साल से जारी

भोपाल: टीवी सीरियल सीआईडी इन दिनों लोगों को खूब प्रसंद आ रहा है। इस सीरियल को देखकर यदि यह लगता है कि सीआईडी चंद दिनों में ही जांच पूरी कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में कामयाब हो जाती है तो यह भम्र है। मध्य प्रदेश में सीआईडी जितनी जांच कर रही है उनमें से आधी से ज्यादा जांच पांच साल से पेंडिंग हैं।

प्रदेश के 55 जिलों में से 27 जिलों के हुए कुछ चिन्हित अपराधों की जांच सीआईडी में चल रही है। कुछ जिलों में तो एक से ज्यादा मामलों की जांच सीडीआई कर रही है।

इन जिलों के मामलों में चल रही जांच
प्रदेश में घटित होने वाले कुछ चुनिंदा अपराधों पर कोर्ट, पुलिस महानिदेशक के निर्देश या फरियादी की मांग आदि गाईड लाइन के तहत सीआईडी जांच के आदेश होते हैं। इन मामलों की फिर सीआईडी ही पूरी तरह से जांच करती है।

प्रदेश में ऐसे 61 मामलों की जांच सीआईडी इन दिनों कर रही है। इनमें ग्वालियर जिले के सबसे ज्यादा मामलों की जांच हो रही है। यहां के आठ मामलों की जांच सीआईडी के पास है। इसी तरह रीवा जिले के सात मामलों की जांच सीआईडी कर रही है। नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले के पांच मामलों की जांच सीआईडी के पास है। इंदौर, भोपाल और शाजापुर के चार- चार मामले,नर्मदापुरम जिले के तीन मामले, दमोह, गुना, भिंड, मुरैना, खंडवा, रतलाम जिलों के दो-दो मामलों की जांच सीआईडी कर रही है। इनके अलावा जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, छतरपुर, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, धार, देवास, शहडोल, उमरिया, विदिशा, सीहोर जिले के एक-एक मामले की जांच सीआईडी कर रही है।

इन जिलों की जांच की सुस्त चाल
सीआईडी की कुल 61 जांचों में से 32 मामलों की जांच सुस्त चाल से चल रही है। इन्हें पांच साल से अधिक का समय हो गया है। इनमें ग्वालियर और रीवा के पांच-पांच मामलों की जांच पांच साल से ज्यादा से चल रही है। भोपाल के कुल चार मामलों की जांच सीआइडी कर रही है, इन चारों मामलों को पांच साल से ज्यादा समय से सीआईडी जांच कर रही है। बालाघाट के पांच मामलों में से 2 मामलों की जांच पांच साल से ज्यादा से चल रही है। जबकि जबलपुर, नरसिंहपुर,  छिंदवाड़ा, सिवनी, दमोह, छतरपुर, गुना, अशोकनगर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, इंदौर, रतलाम, देवास, नर्मदापुरम, सीहोर जिले के एक-एक मामले की जांच पांच साल से जारी है।