
बुखार के इलाज में चली गई किशोरी की जान, रिटायर्ड ड्रेसर पर केस; जांच में खुला फर्जी इलाज का खेल
खरगोन : मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के बिस्टान क्षेत्र में एक किशोरी की इलाज के दौरान हुई मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और झोलाछाप उपचार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में पुलिस ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए एक रिटायर्ड ड्रेसर के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी के पास न तो कोई मेडिकल डिग्री थी और न ही मरीजों का उपचार करने अथवा इंजेक्शन लगाने का वैधानिक अधिकार।
बिस्टान थाना प्रभारी गुलाब सिंह रावत ने बताया कि प्रकाश चंद्र गुप्ता के खिलाफ मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 24 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, बिस्टान निवासी गजराज पटेल की बेटी आयुषी पिछले कुछ दिनों से सर्दी, खांसी और हल्के बुखार से पीड़ित थी। 27 मार्च की दोपहर परिजन उसे इलाज के लिए बिस्टान स्थित एक निजी क्लिनिक लेकर पहुंचे, जहां उसका उपचार प्रकाश चंद्र गुप्ता द्वारा किया गया।
परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान किशोरी को सलाइन चढ़ाई गई और ड्रिप के माध्यम से इंजेक्शन लगाए गए। कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उसे घबराहट और उल्टी जैसा महसूस होने लगा। स्थिति गंभीर होते देख सलाइन हटाई गई, लेकिन वह क्लिनिक के बाहर बेहोश होकर गिर पड़ी।
परिवार का यह भी आरोप है कि बेहोशी की हालत में भी किशोरी को एक और इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद जब उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो प्रकाश चंद्र गुप्ता स्वयं उसे और उसके माता-पिता को लेकर खरगोन के एक निजी अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया। उन्होंने क्लिनिक के बाहर हंगामा करते हुए उपचार में लापरवाही और गलत इलाज का आरोप लगाया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की गई।
थाना प्रभारी रावत ने बताया कि प्रारंभ में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए खरगोन कलेक्टर भव्या मित्तल ने जांच के आदेश दिए। डॉक्टरों की टीम द्वारा की गई जांच में पुष्टि हुई कि प्रकाश चंद्र गुप्ता जिला अस्पताल में ड्रेसर के पद से सेवानिवृत्त हुआ था और उसके पास किसी भी प्रकार की मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री या उपचार की अनुमति नहीं थी।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित क्लिनिक को सील कर दिया था। फिलहाल पुलिस विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है। वहीं, विसरा रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही किशोरी की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।





