
उज्जैन का रंगमंच मध्य प्रदेश में सबसे सशक्त: वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश दवे को मिलेगा देश का सर्वोच्च नाट्य सम्मान
कीर्ति राणा की रिपोर्ट
उज्जैन। शहर के संस्कृतिकर्मियों के लिये तो यह खुशी की बात है कि वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश दवे जी को देश के प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड के लिए चयनित किए जाने की घोषणा की गई है। उज्जैन में यह सम्मान पाने वाले दवे जी तीसरे रंगकर्मी हैं। उनसे पहले प्रभात कुमार भट्टाचार्य (रंगमंच) और ओम प्रकाश शर्मा (संगीत) सम्मानित हो चुके हैं।
इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए दवे जी का चयन होना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उज्जैन और पूरे प्रदेश के रंगमंच के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है। उन्हें उज्जैन शहर की तरफ से बधाई देने के साथ ही जब पूछा कि आज उज्जैन के रंगमंच को आप कहां देखते हैं? उनका कहना था रंगकर्मियों और दर्शकों के मान से मध्य प्रदेश में उज्जैन का रंगमंच सबसे सशक्त है। फिर हिंदी रंगमंच अन्य भाषाओं के रंगमंच जितनी ख्याति क्यों नहीं प्राप्त कर सका, दवे जी ने स्वीकारा कि मराठी, गुजराती, तमिल आदि क्षेत्रीय भाषाओं का रंगमंच इसलिए आगे है कि उन्होंने परिवारों को जोड़ा है जबकि हिंदी रंगमंच स्वतंत्रता का पक्षधर रहा है। मुंबई में नाटकों के टिकट पांच सौ से पांच हजार तक भी हो तो दर्शक खरीद लेते हैं। यहां तो ‘हमारे राम’ के लिए भी दर्शक टिकट के लिये लालायित रहते हैं कि उसमें कलाकार महत्वपूर्ण हैं।हिंदी नाटकों के प्रति दर्शकों में बाकी भाषाओं के रंगमंच जैसी जागरुकता की जरूरत है।
मूल रूप से बड़नगर निवासी सतीश दवे का 10-12 वर्ष की उम्र में नाटकों से तब जुड़ाव हो गया था जब गणेशोत्सव के लिये उनके घर पर नाटकों की रिहर्सल होती थी।1975 में रायपुर में जब एमके रैना ने वर्कशाप आयोजित की तो उसमें शामिल हुए। अब तक 60 नाटक लिखने के साथ ही लगभग इतने ही नाटकों का निर्देशन कर चुके हैं।
🔹उनके लिखे-निर्देशित बेहद चर्चित रहे नाटक
राजा भाऊ महाकाल के जीवन आधारित ‘एक भूला हुआ सेनानी’ और आज के युवा का अपने बुजुर्गों के प्रति व्यवहार आधारित ‘कतरा-कतरा जिंदगी’ उनके चर्चित नाटक रहे हैं।‘जयति पार्श्वनाथ’ नाटक (लाइट एंड शो) देश के सारे जैन तीर्थों में खेला जा चुका है।
दवे जी को यह सम्मान प्रदर्शन कला के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है, जो संगीत, नृत्य और नाटक के प्रख्यात कलाकारों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए प्रदान किया जाता है।
🔹हर साल ‘बाल मंच’ और ‘परिष्कृति’ शिविर
रंगकर्मी दवे हर साल बच्चों के लिए ‘बालमंच’ नाट्य शिविर (1985 से) और 14 वर्ष से अधिक वालों के लिए ‘परिष्कृति’ शिविर (2013 से) का निशुल्क आयोजन कर रहे हैं। यह भी संयोग है कि पहले जो कई बच्चे बाल मंच में नाट्यकला सीखे वो अब पालक के रूप में परिष्कृति में भाग ले रहे हैं।





