
अंधेरा गहराता जा रहा है…रोशनी फीकी पड़ रही है…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
यह एक पंक्ति बहुत कुछ कह रही है। इसकी व्याख्या वर्तमान संदर्भ में
राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर की जा सकती है। इसकी व्याख्या लोकतंत्र के मंदिर में मची अफरा-तफरी के संदर्भ में भी की जा सकती है। इसकी व्याख्या हर अव्यवस्था के इर्द-गिर्द बुनी जा सकती है। पर आज इन पंक्तियों की चर्चा हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हिन्दी में रूपांतरित तोरु दत्त की कविता ‘द सोवर’ (बीज बोने वाला) की एक पंक्ति है। और तोरू दत्त को अंग्रेज़ी भाषा की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभान्वित कवयित्री माना जाता है जो 21 वर्ष की छोटी सी उम्र में इस दुनिया से विदा हो गई थी। पहले हम ‘बीज बोने वाला’ कविता को पढ़ते हैं।
बीज बोने वाला
ठंडी बरामदे में बैठे हुए,
मैं देखता हूँ कि सूरज की रोशनी तेज़ी से ढल रही है,
गोधूलि बेला अपना राज जमाने के लिए आगे बढ़ रही है।
काम के घंटे लगभग बीत चुके हैं।
परछाइयाँ ज़मीन पर दौड़ रही हैं:
लेकिन एक बोने वाला अभी भी रुका हुआ है,
बूढ़ा, फटे-पुराने कपड़ों में, वह धैर्य से खड़ा है।
उसे देखते हुए, मुझे रोमांच महसूस होता है।
काला और ऊँचा, उसकी आकृति
गहरी क्यारियों पर हावी है!
अब बोने का काम शुरू हो गया है।
जल्द ही कटाई का समय आएगा।
वह मैदान में
इधर-उधर चलता है, और
अपने हाथों से कीमती अनाज बिखेरता है;
मैं उसे चलते हुए देखकर विचार करता हूँ।
अंधेरा गहराता जा रहा है। रोशनी फीकी पड़ रही है।
अब उसकी मुद्राएँ मेरी आँखों के लिए
भव्य और विचित्र हैं, – उसकी ऊँचाई
तारों भरे आकाश को छूती हुई प्रतीत होती है।
कवियत्री तोरुदत्त की इस एक कविता से उनकी दृष्टि की गहराई को महसूस किया जा सकता है। तोरु दत्त अथवा तरु दत्त (जन्म- 4 मार्च, 1856 बंगाल, मृत्यु- 5 जुलाई, 1877) अंग्रेज़ी भाषा की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभान्वित कवयित्री थी।तोरु दत्त का जन्म 4 मार्च, 1856 को बंगाल में एक हिन्दू परिवार में हुआ था। तोरु दत्त जब केवल 6 वर्ष की थी, इनके परिवार ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। कुछ का मत है कि तोरु के जन्म से पूर्व ही उनका परिवार ईसाई बन चुका था। इनके पिता गोविंद चंद्र दत्त इन्हें संस्कृत और प्राचीन भारतीय संस्कृति की शिक्षा दिलाने में बड़ी रुचि लेते थे। 1868 ई. में तोरु के परिवार ने यूरोप की यात्रा की। फ्रांस में तोरु को फ्रेंच भाषा सीखने का अवसर मिला। तोरु ने कैम्ब्रिज में अंग्रेज़ी का अध्ययन किया। तोरु दत्त विदेश में ही अंग्रेज़ी में कविताएँ लिखने लगी थीं। 1873 में तोरु का परिवार कोलकाता वापस आ गया।
तोरु दत्त की ख्याति भारत की अंग्रेज़ी भाषा की श्रेष्ठ प्रतिभावान कवयित्री के रूप में है। इन्होंने साहित्य को अपने जीवन का मुख्य लक्ष्य बनाया। ये संस्कृत साहित्य के आधार पर सीता, सावित्री, लक्ष्मण, ध्रुव, प्रह्लाद आदि की कथाओं को अपनी प्रतिभा का पुट देकर अंग्रेज़ी काव्य में व्यक्त करने लगीं।
लेकिन अभी अभी जीवन की यात्रा शुरू ही की थी कि तोरु दत्त की मृत्यु 5 जुलाई, 1877 को हो गई। यदि 21 वर्ष की अल्प आयु में तोरु का देहांत न होता तो वह अवश्य ही पूर्व और पश्चिम की संस्कृति के बीच साहित्यिक-सेतु का काम करती। लक्ष्मण कविता के एक अंश के साथ, हम तोरुदत्त को और अच्छी तरह से समझ सकते हैं।
लक्ष्मण
सुनो! लक्ष्मण! फिर से वही पुकार!
ये तो मेरे पति की आवाज़ है!
जल्दी करो, उनकी सहायता के लिए दौड़ो,
हे मित्र, अब तुम्हारे पास कोई विकल्प नहीं है।
वे तुम्हें पुकार रहे हैं, शायद उनके शत्रु
उन्हें चारों ओर से घेरे हुए हैं,
ये विलाप तो मृत्यु की अंतिम पीड़ा का संकेत है!
तुम यहाँ क्यों खड़े हो, मानो जादू से बंधे हुए?
यह एक लंबी कविता है और इसके जरिए तोरुदत्त की कविताओं को अपनी-अपनी तरह से व्याख्यायित किया जा सकता है। पर यह बात सही है कि अगर तोरुदत्त को भरपूर जीवन मिलता तो अंग्रेजी साहित्य उनके योगदान रूपी सागर में गोता लगाकर
संतुष्टि के शिखर तक पहुंचा जा सकता था। आइए फिर एक बार तोरुदत्त की बीज बोने वाला कविता की एक पंक्ति ‘अंधेरा गहराता जा रहा है…रोशनी फीकी पड़ रही है…’ पर चिंतन-मनन करते हैं।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





