
नारी शक्ति वंदन कर रहा सदन…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
सितंबर 2023 में पारित हो चुके नारी शक्ति वंदन अधिनियम में लाए गए संशोधन पर लोकसभा में तीखी नोक झोंक जारी है। पक्ष-विपक्ष की तरफ से नुकीले तीर चलाए जा रहे हैं जो एकदम सटीक निशाना लगा रहे हैं। मजे की बात यह है कि यहाँ घायल कोई नहीं होता। हर पक्ष विजेता होता है, हार किसी के खाते में नहीं आती है। जो उठकर बोलता है वहीं नायक नजर आता है। सबके अपने-अपने तर्क हैं। और तर्क भी कसौटी पर खरे उतर रहे हैं। बात नियति पर आ पहुंची है। विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है तो सत्ता पक्ष खुलकर कह रहा है कि उसकी नियति साफ है और अगर विपक्ष ने साथ नहीं दिया तो नारी शक्ति उसे कभी माफ नहीं करेगी। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। उत्तर भारत और दक्षिण भारत में संशोधन विधेयक के असर पर भी बैर भाव की स्थिति बन रही है। गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि एक नैरेटिव खड़ा किया जा रहा है कि दक्षिण के राज्यों की ताकत परिसीमन के बाद कम हो जाएगी, लेकिन उनकी शक्ति घटेगी नहीं बल्कि बढ़ेगी। अमित शाह ने कहा कि वे भारत का गृह मंत्री होने के नाते पूरी जिम्मेदारी से बयान दे रहे हैं। पर सदन में तो समुद्र मंथन चल रहा है। यहां कोई किसी की बात मानने वाला नहीं है। पर यह बात जरूर है कि तीन दिन के विशेष सत्र में पूरा सदन नारी शक्ति का वंदन तो कर ही रहा है। और पक्ष और विपक्ष के शाही वक्ता अपने-अपने भाषणों के जरिए पूरे देश की जनता को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। खासतौर से कम उम्र के नए नेतृत्व की भाषण शैली, शायद उस सन्दर्भ को याद दिलाती है, जिसमें कभी अटल बिहारी वाजपेयी की ओजस्वी भाषण शैली से गदगद होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यह बात कही थी कि यह व्यक्ति एक दिन प्रधानमंत्री जरूर बनेगा।
थोड़ा सा जिक्र करते हैं कि संशोधन विधेयक में टकराव के क्या-क्या मुद्दे हैं। डिलिमिटाइजेशन जैसा शब्द चर्चा के केंद्र में है। दरअसल, संशोधन विधेयक के जरिए 2011 की जनसंख्या को आधार बनाकर लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी की जा रही है। और पक्ष और विपक्ष के बीच में टकराव का मूल केन्द्र यही है। यही केंद्र सक्रिय ज्वालामुखी बनकर लावा उगल रहा है। जिसको निष्क्रिय करने की पूरी कोशिश मोदी-शाह द्वारा की जा रही है। और लग नहीं रहा कि इसका कोई असर होने वाला है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को परिसीमन के नाम पर चक्रव्यूह में घेरा जा रहा है। यह बात और है कि यह दोनों महारथी भी यही दावा कर रहे हैं कि चक्रव्यूह को भेदने में वह माहिर हैं। पर परिणाम ही यह गवाही देंगे कि किसको क्या आता है और विजय किसके हिस्से में आती है या पराजय नारी शक्ति वंदन की होने वाली है। दरअसल, परिसीमन के जरिए सीटों की संख्या 850 तक करने की तैयारी हो चुकी है। विपक्ष की शंका है कि इस संख्या में साजिश की गंध छिपी है। इसके चलते सत्ता पक्ष लोकसभा सीटों को अपने फायदे के मुताबिक तैयार करना चाहता है। और 2011 की जनसंख्या को आधार बनाकर जाति जनगणना से बचना चाहता है और ओबीसी एवं अन्य जातियों के हितों पर कुठाराघात करना चाहता है। तो सत्ता पक्ष बार बार यह समझाइश देने की कोशिश कर रहा है कि उनके मन में कुछ भी गलत नहीं है। नारी के नाम पर साजिश करने का उनका कोई इरादा नहीं है। पर बात बहुत मुश्किल है।
पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज बड़ी जिम्मेदारी के साथ इस सदन से कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य हो… ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। भूतकाल में जो सरकार रही, जिनके काल में जो परिसीमन हुआ, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा, और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं… क्योंकि अगर नीयत साफ है, तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है। हम उस अहंकार में न रहें कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं… जी नहीं! उसका हक है। हमने कई दशकों से रोका हुआ है। आज उसका प्रायश्चित कर उस पाप से मुक्ति पाने का अवसर है। और अगर इसमें सबकी सहमति रहेगी तो नारीशक्ति भी सबके साथ रहेगी। अन्यथा, जिसने इसका विरोध किया उसको राजनैतिक खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा।
महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि इसमें ओबीसी का हक मिलना चाहिए। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि बिल में ओबीसी का जिक्र नहीं है। प्रियंका ने कहा कि महिला आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को सत्ता बनाए रखने के लिए बहाने के तौर पर उपयोग करने का आरोप लगाया और दावा किया कि यदि परिसीमन के प्रावधान वाला विधेयक पारित हो गया तो देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा।
तो यही कहा जा सकता है कि नारी शक्तिबन्धन अधिनियम पर राह बहुत आसान नहीं है। सत्ता पक्ष ने जो संशोधन सामने रखा है उसके लिए फिलहाल यही कहा जा सकता है कि बहुत कठिन है डगर पनघट की। पर यह बात ज़रूर है कि इस बहाने ही सही पूरा सदन नारी शक्ति का वंदन तो कर ही रहा है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





