छतरपुर में 51 फीट ऊंची अष्टधातु की हनुमान प्रतिमा स्थापित, ‘विश्व की एकमात्र’ होने का दावा.

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छतरपुर में 51 फीट ऊंची अष्टधातु की हनुमान प्रतिमा स्थापित, ‘विश्व की एकमात्र’ होने का दावा.

छतरपुर (मध्यप्रदेश) छतरपुर शहर के जानराय टोरिया में 51 फीट ऊंची और लगभग 171 कुंटल वजनी अष्टधातु से निर्मित भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। इस प्रतिमा को लेकर धार्मिक संतों और आयोजकों ने दावा किया है कि यह अपने प्रकार की “विश्व की एकमात्र” प्रतिमा है।

प्रतिमा की स्थापना के साथ ही यह स्थल श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के बीच आस्था का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं।

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संकल्प से साकार हुई प्रतिमा..

निर्मोही अखाड़ा के महंत और पीठाधीश्वर महंत भगवानदास ने बताया कि यह प्रतिमा उनके वर्षों पुराने संकल्प का परिणाम है। उनके अनुसार, जब अयोध्या में भगवान राम अपने सिंहासन पर विराजमान होंगे और सदियों पुराना विवाद समाप्त होगा, तब वे बुंदेलखंड में हनुमान जी की एक भव्य प्रतिमा स्थापित करेंगे जो अब पूर्ण हो चुका है।

राम-हनुमान के अद्वितीय स्वरूप का दावा..

महंत भगवानदास के अनुसार, जानराय टोरिया में भगवान राम “आजानभुज सरकार” के रूप में अकेले विराजमान हैं, जो खर-दूषण वध के प्रसंग को दर्शाता है। उनका दावा है कि ऐसा स्वरूप विश्व में अन्यत्र कहीं स्थापित नहीं है। इसी कारण यहां हनुमान जी की भी विशिष्ट और विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है।

-संतों का समर्थन..

इस दावे का समर्थन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, चित्रकूट के कामदगिरि पीठाधीश्वर स्वामी रामस्वरूपाचार्य कामतानाथ सहित अन्य संतों ने भी किया है। उन्होंने इसे बुंदेलखंड के लिए गौरव का विषय बताया।

प्रतिमा की प्रमुख विशेषताएं

ऊंचाई: 51 फीट..

वजन: लगभग 171 कुंटल

धातु: अष्टधातु

स्थान: जानराय टोरिया

उद्देश्य: आस्था, भक्ति और संकल्प की अभिव्यक्ति

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा..

इस भव्य प्रतिमा की स्थापना से छतरपुर सहित पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहा है।

-दावे पर बहस जारी..

हालांकि “विश्व की एकमात्र” प्रतिमा होने के दावे को लेकर विशेषज्ञों के बीच चर्चा भी शुरू हो गई है। उनका मानना है कि ऐसे दावों की पुष्टि के लिए व्यापक शोध और प्रमाण आवश्यक होते हैं।

निष्कर्ष..

फिलहाल, यह प्रतिमा आस्था, संकल्प और भक्ति का प्रतीक बनकर छतरपुर की पहचान को नई ऊंचाई दे रही है और तेजी से एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में उभर रही है।