
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: ऐतिहासिक संकल्प, राजनीतिक चुनौतियां और मध्य प्रदेश का विशेष सत्र
नीलिमा तिवारी
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी विकास के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसमें देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में बराबरी का अधिकार देने की बात कही गई है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का यह प्रस्ताव लंबे समय से लंबित एक ऐतिहासिक मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस पहल के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट संकल्प और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई देती है। उनके अनुसार, “नारी शक्ति” केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत के विकास की आधारशिला है।
महिला आरक्षण का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 1996 से लेकर 2010 तक कई प्रयास हुए, लेकिन राजनीतिक असहमति के कारण यह विधेयक बार-बार अटकता रहा। 2010 में राज्यसभा से पारित होने के बावजूद यह लोकसभा में लंबित रहा। आलोचकों का मानना है कि पूर्व सरकारों के पास अवसर होने के बावजूद ठोस निर्णय नहीं लिया गया।
वर्तमान सरकार ने इसे प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ाया, हालांकि विपक्ष ने इसके क्रियान्वयन को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ते हुए समय-सीमा पर सवाल उठाए। यह विवाद दर्शाता है कि बड़े सामाजिक सुधारों के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति जरूरी होती है।
पिछले एक दशक में महिलाओं के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत अभियान और जनधन योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त किया है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को इसी परिवर्तन की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
मध्य प्रदेश का विशेष सत्र और सक्रिय पहल
इस संदर्भ में मध्य प्रदेश की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहां 27 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है। यह सत्र राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि महिला सशक्तिकरण केवल नीतिगत घोषणा नहीं, बल्कि व्यवहारिक प्राथमिकता है।
योजनाओं के जरिए जमीनी सशक्तिकरण
मध्य प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई व्यापक और प्रभावी योजनाएं लागू की गई हैं, जिन्होंने सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत किया है।
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत लगभग 1.26 करोड़ महिलाओं को हर महीने 1500 रूपए की प्रत्यक्ष सहायता मिल रही है। जून 2023 से अब तक 55,000 करोड़ रूपए से अधिक राशि वितरित हो चुकी है, जिससे महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिली है।
लाड़ली लक्ष्मी योजना ने बालिका शिक्षा और भविष्य सुरक्षा को बढ़ावा दिया है। अब तक 53 लाख से अधिक बालिकाएं पंजीकृत हुई हैं और लाखों को छात्रवृत्ति का लाभ मिला है।
स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 62 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल के तहत 12 लाख महिलाओं की आय 1 लाख रुपए वार्षिक से अधिक हो चुकी है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना और मातृशिशु संजीवन अभियान जैसी स्वास्थ्य योजनाओं ने गर्भवती महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
सामाजिक सुरक्षा के तहत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना और मुख्यमंत्री कल्याणी पेंशन योजना से लाखों महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एमएसएमई नीति 2025 के तहत निवेश पर 48 प्रतिशत तक अनुदान और स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
सुरक्षा और सहायता के लिए राज्य में 57 वन स्टॉप सेंटर, शक्ति सदन और सखी निवास जैसी सुविधाएं संचालित हैं, जो संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा और आवासीय सहयोग प्रदान करती हैं।
आज महिलाएं केवल मतदाता नहीं, बल्कि नीति-निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जागरूकता के बढ़ते स्तर ने उन्हें अपने अधिकारों के प्रति अधिक मुखर बनाया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक विधायी सुधार नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। यह लोकतंत्र को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, इसके सामने राजनीतिक चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की सक्रिय पहल यह दिखाती है कि महिला सशक्तिकरण अब केवल चर्चा का विषय नहीं, बल्कि नीति और क्रियान्वयन का केंद्र बन चुका है।
अंततः, यह अधिनियम एक विचार है—ऐसा विचार, जो तब पूर्ण होगा जब देश की आधी आबादी निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबरी से भागीदारी करेगी। यही सच्चे अर्थों में लोकतंत्र की सफलता और भारत के समावेशी विकास की पहचान होगी।
(गजानंद फीचर सर्विस)





