
Raghav Chadda Case: गुरु गुड रह गया, चेला शक्कर हो गया
वेद माथुर की विशेष रिपोर्ट
राजनीति का खेल अजीब है। कभी शिकारी बनकर घूमते हो, कभी खुद जाल में फंस जाते हो। आम आदमी पार्टी (AAP) के एक समय के चहेते राघव चड्ढा का केस ठीक यही बयान करता है। जो शुरू से पार्टी के फंड मैनेजमेंट से जुड़े रहे, वही आज पार्टी छोड़कर दूसरी राह पकड़ रहे हैं। गुरु (अरविंद केजरीवाल) तो अभी भी “आम आदमी” का चेहरा बनाए हुए हैं, लेकिन चेला (राघव) शक्कर बनकर मीठा-मीठा बोलते हुए माल लेकर निकल लिया।
फंड का खेल:
100-200 करोड़ की अफवाहें:
राघव चड्ढा AAP से शुरू से जुड़े थे। चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते पार्टी के फंड मैनेजमेंट में उनकी अहम भूमिका रही। कहा जाता है कि पार्टी के फंड में आम तौर पर “खाते में काम” और “लोगों के पास ज्यादा” होता है।
कुछ सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा ने इसमें से 100 से 200 करोड़ रुपये मार लिए (ये आरोप राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा में रहे हैं)।हालांकि ये आरोप साबित नहीं हुए हैं, लेकिन राजनीति में “कहा जाता है” की भी अपनी कीमत होती है। खासकर जब शादी जैसा बड़ा फैसला सामने हो।
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हीरोइन से शादी और बैलेंस शीट की कहानी:
राघव चड्ढा की शादी बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से हुई। कोई भी हीरोइन जब शादी करती है तो पति की बैलेंस शीट सिर्फ देखती नहीं, वेरीफाई भी करती है। केजरीवाल की “दो नंबर” कमाई (जैसा विपक्ष आरोप लगाता रहा) को मारकर राघव ने न सिर्फ हीरोइन से शादी कर ली, बल्कि कहा जाता है कि लंदन या किसी और विदेशी जगह पर प्रॉपर्टी भी सेट कर ली।
शादी के बाद राघव ने खुद कहा था कि अब उन्हें वर्क-लाइफ बैलेंस समझ आया है। शायद बैलेंस शीट पहले से ही मजबूत थी!
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दामाद बनने का सपना और रैपिड प्रमोशन:
राघव चड्ढा ने केजरीवाल को “दामाद” बनने का सपना दिखाया या नहीं, ये तो वही जानें, लेकिन नतीजा साफ है। नौसिखिए युवा को इतने सारे “प्रसाद” एक साथ मिलना आसान नहीं होता:
दिल्ली विधायक (2020)
दिल्ली जल बोर्ड के वाइस चेयरमैन
पंजाब सरकार की सलाहकार समिति के चेयरमैन
पंजाब से राज्यसभा सांसद (सबसे युवा MP)
कोई भी पार्टी इतनी जल्दी इतने बड़े पद एक साथ नहीं देती। लगता है केजरीवाल ने उन्हें “भरोसेमंद” समझा। लेकिन राजनीति में भरोसा अक्सर “जब तक काम चले” तक ही होता है।
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गुरु खुद मूर्ख बने: शिकारी शिकार हो गयाकेजरीवाल खुद को “लोगों को मूर्ख बनाने वाली उच्च उत्पादकता की मशीन” समझते रहे। लेकिन इस बार वे खुद मूर्ख बन गए। राघव चड्ढा जैसे चहेते को उन्होंने बहुत ऊपर उठाया, लेकिन जब संकट आया तो चेला भाग गया।
राघव चड्ढा की होशियारी के कुछ और उदाहरण:
संकट में लंदन भागना: जब अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए (एक्साइज पॉलिसी केस में), तो राघव चड्ढा लंदन चले गए। उन्होंने कहा था कि ये आँख की सर्जरी के लिए था। लेकिन पार्टी के कई नेता और विपक्ष इसे “डर” से जोड़ते हैं। डर था कि फंड मैनेजमेंट के चक्कर में CBI-ED उन्हें भी घसीट सकती है। पार्टी के प्रदर्शनों में उनका गायब होना सवाल खड़ा करता रहा।
फॉर्जरी का विवाद:
2023 में दिल्ली सर्विसेज बिल से जुड़े मोशन में राघव चड्ढा पर पांच सांसदों के सिग्नेचर फॉर्ज करने का आरोप लगा। अमित शाह ने खुद सदन में इसे फ्रॉड बताया। राघव ने कहा, “प्रिविलेज कमिटी नोटिस भेजे तो जवाब दूंगा।” बाद में उन्हें राजसभा से सस्पेंड भी किया गया।
पार्टी से ब्रेकअप और BJP जॉइन:
2026 में राघव चड्ढा ने AAP छोड़ दी और छह अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ BJP में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने मूल आदर्शों से भटक गई है। AAP ने इसे “ऑपरेशन लोटस” बताया। राघव ने AAP पर भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत फायदे का आरोप लगाया, जबकि AAP ने उन्हें “कॉम्प्रोमाइज्ड” बताया।
पंजाब में पावर सेंटर:
पंजाब में वे CM भगवंत मान के एडवाइजर बने और काफी पावरफुल माने जाते थे। लेकिन संकट के समय डर कर लंदन भागने से बाद में उनका प्रभाव घटता गया।
राघव चड्ढा को इस्तीफा के लिए भी कहा गया लेकिन वह मुकर गए।
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राजनीति में वफादारी अस्थायी होती है, लेकिन “होशियारी” हमेशा याद रखी जाती है। आज राघव चड्ढा शिकार होकर चले गए, कल कोई और शिकारी बनेगा।
सवाल ये है: असली शिकार कौन था – फंड, पार्टी, या केजरीवाल का भरोसा?





