भोजशाला फैसले के बाद हिंदू समाज में उत्साह,सुबह से भोजशाला में पहुंचकर गर्भ गृह में पुष्प अर्पित कर रहे है

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भोजशाला फैसले के बाद हिंदू समाज में उत्साह,सुबह से भोजशाला में पहुंचकर गर्भ गृह में पुष्प अर्पित कर रहे है

छोटू शास्त्री की रिपोर्ट

धार: धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर कल इंदौर हाई कोर्ट के फैसले के बाद आज सुबह भोज उत्सव समिति के पदाधिकारी और वर्षों से आंदोलन से जुड़े लोग भोजशाला पहुंचे, यहां पहुंचकर उन्होंने गर्भ गृह में पुष्प हार चढ़कर मां-वाग्देवी की आराधना की।

भोज उत्सव समिति के सदस्यों ने बताया कि फैसला आने के बाद आज मां-वाग्देवी की पहली आराधना और पूजन लंबे समय से जुड़े उन आंदोलनकारी और मां वाग्देवी की मुक्ति के लिए अपना बलिदान देने वाले उन शहीदों को समर्पित है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में मां-वाग्देवी के प्रतिमा वापस लाने के लिए संकल्पित है और उसके प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इस दौरान समिति सदस्यों और श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर मुँह मीठा करवाया। वहीं सुरक्षा को लेकर बात की जाए तो बड़ी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स और पुलिस बल भोजशाला के अंदर और बाहरी परिसर में तैनात है।

प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार गश्त कर रहे हैं। जिला प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि फैसले के बाद शांति और सौहार्द बनाए रखने में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी, फिलहाल शहर की स्थिति सामान्य बनी हुई है।

बाइट 1- हेमंत दौराया, महाप्रबंधक भोज उत्सव समिति धार आज बड़ा खुशी का दिन है की पहली बार आज हिंदू समाज बड़े उत्साह के साथ अपने माँ के पावन मंदिर में दर्शन करने के लिए आ रहा है। दर्शन तो पहले भी करता था किन्तु पहले वो टिकट लिखा था और दर्शन करता था कल माननीय उच्च न्यायालय ने जब भोजशाला को भोजशाला सरस्वती मंदिर घोषित किया तब से श्रद्धालु यहाँ पर आ रहे है दर्शन करने के लिए और उसे लग रहा है की माँ के पावन मंदिर में पूजन अर्चन करने के लिए बिना शुल्क के जा सकते हैं। जिस प्रकार से बसंत पंचमी के दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए वैसे ही आज पूरा हिंदू समाज दिन भर यहाँ पर दर्शन करने के लिए आएगा और रोज़ इस प्रकार की व्यवस्था मेरे को लगता है कि हिंदू समाज बनाएगा कि वो प्रतिदिन यहाँ दर्शन करने के लिए आएगा।

बाइट 2- अशोक जैन, भोज उत्सव समिति धार जितनी भी पिटिशन लगी थी सबका माननीय न्यायालय द्वारा सुना गया और माननीय न्यायालय द्वारा खुद यहाँ आकर स्वयं इसका निर्णय किया गया। सर्वे की जो रिपोर्ट थी उसको देखने के हिसाब से उन्होंने सर्वे किया और सर्वे में लगता है कि माँ का मंदिर है उसी को लेकर जो फैसला हुआ वो लगा कि उन्होंने जो देखा उसी को उन्होंने सुनाया है कि ये माँ का मंदिर है, राजा भोज के द्वारा बनाया मंदिर है। पाठशाला है। हिंदू समाज इसमें अखंड पूजा अर्चना 24 घंटे 12 महीने कभी भी जाकर पूजा अर्चना कर सकता है। ये हमको छूट मिली है और इस छूट के पीछे सबसे बड़ा योगदान हमारे उन कार्यकर्ताओं का है जो जेल में गए जिन्होंने जेल यात्रा झेली जो रासुका में गए और जो तीन कार्यकर्ता शहीद हुए उनको मैं श्रद्धा सुमन करता हूँ कि उनके कारण ही आज हमें माँ सरस्वती मंदिर भोजशाला में दर्शन करने की अनुमति मिली।