
Dhar Bhojshala Dispute: हीरो काले कोट में भी होते हैं, भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष की जीत के बाद पिता-पुत्र की तारीफों के पुल बंधे
Dhar Bhojshala Dispute: हीरो काले कोट में भी होते हैं। भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष की जीत के बाद पिता-पुत्र की तारीफों के पुल बंधे जा रहे है।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और उनके पिता हरिशंकर जैन देश में हिंदू धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों की पैरवी करने के कारण लगातार चर्चा में रहे हैं.
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद में इंदौर के हाई कोर्ट में वैसे तो कई वकीलों ने पैरवी की लेकिन आज हिंदू पक्ष की जीत के हीरो भी वही माने जा रहे हैं. इस जीत के बाद सोशल मीडिया में नेटीजंस उनकी तारीफों के पुल बांधे जा रहे हैं.
72 साल के हरिशंकर जैन और 40 साल के उनके बेटे विष्णु शंकर जैन विभिन्न हिंदू और सनातन संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और वे हिंदू धार्मिक स्थलों, धार्मिक अधिकारों व विवादों से जुड़े 100 से अधिक हाई प्रोफ़ाइल मुकदमो की वकालत में शामिल है .
हरिशंकर जैन उत्तर प्रदेश के लखनऊ से हैं और उन्होंने 1976 में वकालत शुरू की थी. उनके पुत्र विष्णु शंकर जैन ने 2010 में पुणे के लॉ कॉलेज से डिग्री लेकर पिता का साथ देना शुरू किया और दोनों को मंदिरों की मुक्ति का मसीहा कहे जाने लगे . नेशनल टीवी की डिबेट्स में भी अक्सर उन्हें देखा जाता है.
हरिशंकर जैन का नाम अयोध्या राम जन्म भूमि डिस्प्यूट से जुड़े कानूनी मामलों में भी सामने आया था. वे राम जन्मभूमि से जुड़े हिंदू पक्ष के समर्थक अधिवक्ताओं में से रहे और विभिन्न चरणों में इससे जुड़े मामलों और याचिकाओं में सक्रिय रहे.
विष्णु शंकर जैन ने वाराणसी स्थित ज्ञानवापी परिसर में हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी की और सर्वे, पूजा अधिकार, ASI जांच जैसे मामलों में वह प्रमुख वकील है. मथुरा के श्री कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईद के विवाद में भी उन्होंने हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है. साथ ही आगरा के ताजमहल को प्राचीन शिव मंदिर ‘तेजो महालय’ बताने से जुड़े मामले में भी विष्णु शंकर जैन याचिकाओं की ओर से अदालत पहुंचे थे.
दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में हिंदू और जैन देवी देवताओं की टूटी मूर्तियों की पूजा की अनुमति मांगने वाले मामले में भी वे शामिल थे. हरिशंकर जैन ने कर्नाटक के हिजाब विवाद मामले में भी पैरवी करते हुए धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े तर्क रखे थे. पिता पुत्र की जोड़ी ने उत्तर प्रदेश के संभल की जामा मस्जिद में हरिहर मंदिर का दावा करते हुए पैरवी की थी.
प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट 1991 में भी पिता पुत्र और अन्य अधिवक्ताओं ने इसकी व्याख्या और वैधता से जुड़े कानूनी तर्क अदालत में रखे हैं.वे उन अधिवक्ताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने ज्ञानवापी, कृष्ण जन्मभूमि और भोजशाला जैसे मामलों में यह तर्क रखा कि 1991 का वरशिप एक्ट हर परिस्थिति में लागू नहीं होता, विशेषकर तब जब किसी धार्मिक स्थल के मूल स्वरूप और ऐतिहासिक तथ्यों की जांच की मांग की जा रही हो।
भोजशाला विवाद में हिंदू पक्ष की तरफ निर्णय आने पर विष्णु शंकर जैन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मेरे पूज्य पिताजी हरिशंकर जैन जी की कठोर मेहनत तपस्या और संघर्ष का परिणाम है कि आज हिंदू समाज यह दिन देख पाया है. 2 मई 2022 को उन्होंने माननीय इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इस न्यायिक लड़ाई की शुरुआत की थी जिसके परिणाम स्वरूप आज ऐतिहासिक फैसला आया है.
उनके इस सोशल मीडिया पोस्ट पर उन्हें कोई सनातन रत्न कह रहा है तो कोई देवी अहिल्याबाई होलकर की तरह सनातन की सेवा व रक्षा करने वाला निरूपित कर रहा है. एक सोशल मीडिया हैंडलर ने लिखा ‘आप पिता पुत्र इस कलयुग के दधीचि है, बारंबार प्रणाम है दोनों को’.कुछ ने उन्हें भारत माता का सपूत निरूपित करते हुए कहा कि इस योगदान को इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में याद रखा जाएगा.
एक हैंडलर ने लिखा इस सनातन के हरि / विष्णु ही जगत नियंता जगदाधार है. एक ने लिखा, हीरो काले कोट में भी होते हैं. एक नेटीजन ने लिखा कि जैन कुल में उत्पन्न पिता पुत्र ने जो भी कुछ हिंदू समाज के लिए अपनी बुद्धि कौशल व जुझारूपन से अर्जित किया है,वह इतिहास में अंकित हो गया है.





