खंडवा का 2130 हेक्टेयर अतिक्रमण मुक्त जंगल एक साल में हराभरा, वन अमले का करिश्मा, चारों ओर हरे बांस

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खंडवा का 2130 हेक्टेयर अतिक्रमण मुक्त जंगल एक साल में हराभरा, वन अमले का करिश्मा, चारों ओर हरे बांस

गणेश पांडे की रिपोर्ट 

भोपाल। मप्र में पहली बार खंडवा वन मंडल ने न केवल 2130 हेक्टेयर जंगलों को अतिक्रमण से मुक्त कराया बल्कि उस पूरे क्षेत्र को हरा -भरा कर दिया। ऐसा डीएफओ राकेश डामोर और उनकी टीम के अथक प्रयासों से संभव हुआ है।

खंडवा वन परिक्षेत्र गुड़ी में एक समय वन भूमि पर लगातार कब्जों और कटाई से क्षेत्र की हरियाली लगभग समाप्त हो चुकी थी, लेकिन बीते एक वर्ष में वन विभाग की लगातार निगरानी, गश्त और कार्रवाई ने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। बावजूद इसके, एसएएफ और वन विभाग के 30 कर्मियों लगातार निगरानी करते हैं। ड्रोन से नजर रखी जाती है।

खंडवा में वन विभाग के लिए पिछला एक वर्ष किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहा. लंबे समय हो रहे अतिक्रमण और अवैध कब्जों के कारण जंगल सिमटता जा रहा था. करीब 2130 हैक्टेयर जंगलों की जगह खेती कर अतिक्रमणकारी रहने लगे। वर्ष 2018 के बाद यहां अतिक्रमण की बाढ़ सी आ गई। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने अतिक्रमण रोकने और वन क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया। वर्ष 2024-25 में नहारमाल और भिलाई खेड़ा की जमीन को भारी पुलिस बल के साथ अतिक्रमण मुक्त कराया।

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*अतिक्रमण हटाने के बाद लगाए 35 हजार बांस*

कई बार अतिक्रमणकारियों से हुई झड़प इसके बाद जमीन को कब्जे से बचाने के लिए रेंजर नरेंद्र पटेल ने कार्ययोजना बनाकर नियमित गश्त बढ़ाई। संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी की और कई बार अतिक्रमणकारियों के विरोध तथा झड़पों का सामना भी किया। वनकर्मियों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने प्रयास जारी रखे, जिसके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि पर बांस के पौधे और बबूल के बीज बोए गए। बारिश और संरक्षण के कारण अनेक स्थानीय प्रजातियों के पौधे स्वत: विकसित होने लगे। वर्तमान में बड़ी संख्या में नए पौधे और झाड़ियां क्षेत्र में दिखाई दे रही हैं, जिससे जंगल का स्वरूप फिर से उभरने लगा है।

*गुड़ी रेंज बंजर से हरियाली में बदला*

खंडवा डीएफओ राकेश कुमार डामोर का कहना है “गुड़ी रेंज में अब हरियाली नजर आने लगी है। जहां पहले बंजर और अतिक्रमित भूमि थी, वहां अब हरियाली है। वन्यजीवों की गतिविधियों में भी बढ़ गई है। चीतल, सांभर और तेंदूए भी नजर आने लगे हैं। जंगल बचाने का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा. अतिक्रमण रोकने के साथ ही पौधरोपण और प्राकृतिक वन संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है.”

वन विभाग के अनुसार 400 हेक्टेयर में विकसित जंगल में 35 हजार बांस के पौधे लगाए हैं।