
किसानों की यह चिंता अच्छी है…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
हमारे हलधर किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, इस धरा के वास्तविक शुभंकर है। वे अपने अथक परिश्रम से पूरे समाज का उदर-पोषण करते हैं। किसानों की खुशहाली ही हमारी सरकार का संकल्प हैं क्योंकि किसान समृद्ध होगा, तभी हमारा प्रदेश और देश समृद्ध होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के यह भाव वास्तव में किसानों के अधिकारों के प्रति सरकार की सजगता सामने लाते हैं। लाख टके की बात यही है कि हमारे हलधर किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं, इस धरा के वास्तविक शुभंकर है। और इस भाव को आगे बढ़ाया जाए तो
सरकार को जल्दी ही कोई ऐसी नीति बनानी चाहिए ताकि किसानों को भले ही मजबूरी में अपनी जमीन बेचनी पड़े तब भी किसानों की जमीन में साझेदारी पूरी तरह से खत्म न हो सके। मतलब यही है कि बाद में अगर उनकी जमीन पर कॉलोनी बने तब भी किसान का एक हिस्सा लाभ के रूप में उन्हें मिले। अगर किसान की बेची हुई जमीन पर कोई उद्योग लगे तब उद्योग में किसान की लाभ में हिस्सेदारी का कोई फॉर्मूला सरकार को बनाना चाहिए। ताकि अन्नदाता के लिए भूमि उम्र भर शुभंकर बनी रहे। ताकि हर स्थिति में किसान समृद्ध हो, प्रदेश और देश समृद्ध हो और किसानों की खुशहाली बनकर सरकार का संकल्प पूर्ण हो। इसमें कुछ इस तरह भी किया जा सकता है कि फार्म हाउस में दस फीसदी जमीन पर ही निर्माण कार्य वैध है। इस तर्ज पर सरकार ऐसा कर सकती है कि किसान अपनी जमीन बेचे, तब भी उसकी हिस्सेदारी का कोई प्रावधान किया जा सके। ताकि मजबूरी या खुशी दोनों ही स्थितियों में जमीन बेचने के बाद भी किसानों का हित हमेशा अक्षुण्ण रहे। यह मुद्दा एक लंबी बहस का विषय हो सकता है लेकिन अगर व्यावसायिक उपयोग के लिए किसानों की जमीन
खरीदी जा रही है तब उनके हितों की ऐसी चिंता करके सरकार
एक क्रांतिकारी कदम उठाकर इतिहास बना सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकौशल की धरती धान उत्पादन के लिए जग प्रसिद्ध है। शेर की दहाड़ और सतपुड़ा के पहाड़ और अब यहां की छत्रिय धान इस क्षेत्र की बड़ी पहचान है। छत्रिय धान को अब भौगोलिक संकेतक टैग (जीआई टैग) मिल गया है। यह हमारी देशज और पारंपरिक कृषि का वैश्विक सम्मान है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के धान उत्पादक किसानों के हित में बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब धान की फसल पर भी भावांतर योजना का लाभ दिया जाएगा। राज्य सरकार धान उत्पादक किसानों को एमएसपी और बाजार मूल्य के बीच के अंतर की राशि का भुगतान करेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत जी-राम-जी योजना (मनरेगा का नया स्वरूप) के तहत प्रदेश में विभिन्न श्रेणी के कार्य लगातार चलायें जाएंगे। किसानों और रोजगार के जरूरतमंदों को कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना अंतर्गत प्रदेश के 3 हजार 941 किसानों को 1 हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से कोदो-कुटकी के बोनस के रूप में 2 करोड़ 84 लाख रुपए किसानों के खातों में अंतरित किए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार श्रीअन्न उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के साथ-साथ बोनस भी दे रही है। हमने प्रदेश में पहली बार शासकीय स्तर पर कोदो कुटकी खरीदने के लिए अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का को गरीबों की फसल कहा जाता था। उसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीअन्न को प्रोत्साहित करने के लिये योजना शुरू कर देश-दुनिया में इसका मान बढ़ाया। श्रीअन्न में मौजूद तत्व सबसे जल्दी पचता है। राज्य सरकार ने पिछले साल से श्रीअन्न खरीदने की शुरुआत की है। इस वर्ष मानसून पर अलनीनो का प्रभाव नजर आ रहा है। अगर बारिश कम होती है तो किसानों को तैयार रहना चाहिए कि वे कोदो कुटकी सहित सभी फसलों को तैयार कर लें। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 40 हजार मीट्रिक टन कोदो-कुटकी उपार्जन का लक्ष्य रखा है। सरकार द्वारा डिंडौरी में ‘मध्यप्रदेश राज्य श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र’ की स्थापना की जा रही है। कुछ दिन पहले ही डिंडौरी की सिताही कुटकी, नागदमन कुटकी और बैंगानी अरहर को भी जीआई वैश्विक पहचान मिली है।
निश्चित तौर से किसानों की चिंता में मध्य प्रदेश
देश के बाकी राज्यों से बहुत आगे है। और इसीलिए मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन में
देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। दूसरी फसलों में भी मध्यप्रदेश अन्य राज्यों से आगे है। ऐसे में अब धान पर भी भावांतर योजना का लाभ किसानों की स्थिति मजबूत करेगा। और
किसानों के लिए धरा हमेशा शुभंकर बनी रहे, इस दिशा में यदि सरकार कोई सार्थक प्रयास करती है
तब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हमेशा-हमेशा के लिए किसानों के दिलों में अपनी जगह स्थायी कर सकते हैं। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि धान पर भावांतर देकर
किसानों की चिंता करना वाकई अच्छी बात है…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





