
CM A+ Monit Cases: सीएम की घोषणाओं और तबादलों की सिफारिशों को जानबूझकर लंबित रखने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज
भोपाल: मुख्यमंत्री के CM A+ Monit Cases और ए मानिट के प्रकरणों और मुख्यमंत्री की घोषणाओं को जानबूझकर लंबित रखने वाले अफसरों पर गाज गिर सकती है।
मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने इस संबंध में आज अचानक सभी विभागों के आला अफसरों की बैठक बुलाई। इसमें मुख्यमंत्री की घोषणा, मुख्यमंत्री द्वारा अनुमोदित तबादले और अन्य विशिष्ट मामलों के निराकरण में देरी क्यों की जा रही है, इस पर मुख्यमंत्री ने सीधे अफसरों से बात की।
बैठक में जब मुख्यमंत्री ने यह फरमान दिया कि आज ही A+ नोट शीट के तबादला आदेश जारी किए जाएं तो विभागों के अफसरों में हड़कंप मच गया है। बता दे कि मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से लंबित मामलों की संख्या और सूची भी विभागों को पहले ही भेजी गई है। सारे विभागों के अफसर आज सुबह से इस सूची को अपडेट करने में लगे रहे। अपडेट सूची के साथ अफसर बैठक में पहुंचें लेकिन कई मामलों में अमल नहीं होने से मुख्यमंत्री नाराज दिखाई दिए।
बता दें कि मुख्यमंत्री सचिवालय में लगातार विभागों से सीएम ए प्लस मानिट और ए मानिट के लंबित मामलों की अपडेट जानकारी विभागों से आती रही। विभागों में भी एसीएस, पीएस और सचिवों ने अपने विभागाध्यक्षों के साथ लंबित मामलों को लेकर चर्चा की और निराकृत मामलों को इस सूची से हटवाने और अपडेट जानकारी तैयार की।
बता दें कि सीएम ए प्लस मानिट में वे सभी मामले आते है जो अतिमहत्वपूर्ण होते है और मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले मामले होते है।
सीएम ए प्लस मॉनिट में आते हैं ये मामले-
-मंत्री, विधायकों, सांसदों की सिफारिशों पर सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशासकीय स्थानांतरण
– निगम, मंडल, बोर्ड, प्राधिकरण और सरकारी निकायों में अध्यक्ष, सदस्यों सहित प्रमुख प्रशासनिक नियुक्तियां
-प्रमुख प्रोजेक्ट्स जो मुख्यमंत्री की तत्काल घोषणाओं या निर्देशों में शामिल है।
-सीएम जनसेवा अभियान या बैठकों में लिए गए निर्णय जो सर्वोच्च प्राथमिकता वाले हो।
-सीएम विवेकाधीन कोष से जुड़ी तुरंत दी जाने वाली आर्थिक सहायता
सीएम ए प्लस मानिट के प्रकरणों पर चौबीस घंटे से लेक पांच दिन में कार्यवाही करना अनिवार्य होता है। मुख्यमंत्री कार्यालय ऐसे अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक मामलों पर खुद सीधी निगरानी रखता है। सीएम ए मानिट के प्रकणों पर पंद्रह दिन की समयसीमा होती है। सीएम कार्यालय स्वयं इनकी निगरानी करता है।





