
Advisory Issued on Snakebite : झाड़-फूंक नहीं, अस्पताल पहुंचें: सर्पदंश पर स्वास्थ्य विभाग की अपील!
Ratlam : वर्षा ऋतु के आगमन के साथ ही जिले में सर्पदंश (सांप काटने) की घटनाओं की संभावनाएं बढ़ जाती है। बारिश की वजह से सांपों के प्राकृतिक बिलों में पानी भर जाने से वे सुरक्षित स्थानों की तलाश में खेतों, खलिहानों, घरों, गोठानों, लकड़ी एवं भूसे के ढेर, झाड़ियों तथा मानव बस्तियों के आसपास निकल आते हैं। इस दौरान खेतों में कार्य करने वाले किसान, जंगल से जुड़े कार्य करने वाले लोग, बच्चे तथा रात्रि में बाहर निकलने वाले नागरिक विशेष रूप से जोखिम में रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिलेवासियों से सर्पदंश की रोकथाम, बचाव एवं समय पर उपचार के संबंध में आवश्यक सावधानियां अपनाने की अपील की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश एक चिकित्सा आपातकाल (Medical Emergency) है, लेकिन यदि पीड़ित को शीघ्र अस्पताल पहुंचाकर वैज्ञानिक एवं चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराया जाए तो अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर किरण वाडिवा ने बताया कि जिले के सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में सर्पदंश पीड़ितों के उपचार हेतु आवश्यक दवाइयों, एंटी स्नेक वेनम (ASV), प्रशिक्षित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थान में भी तत्काल रेफर करने की व्यवस्था है।
सर्पदंश की घटनाएं क्यों बढ़ती हैं?
वर्षा के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं।
सांप का मुख्य आहार चूहे है, इसलिए जहां चूहे पाए जाते हैं, आहार की तलाश में वहां सर्प भी निकलते हैं। खेतों में धान रोपाई एवं कृषि कार्य बढ़ने से लोगों का संपर्क अधिक होता है। घरों के आसपास झाड़ियां, कचरा, लकड़ी एवं भूसे का ढेर सांपों के छिपने का सुरक्षित स्थान बन जाता है। रात्रि में अंधेरे में बिना टॉर्च के चलने से दुर्घटनाएं होती हैं। बरसात के मौसम में चूहों की संख्या बढ़ने से भी सांप आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं।
सर्पदंश से बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां!
घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखें, झाड़ियां, घास एवं अनावश्यक कचरे को नियमित रूप से हटाएं, लकड़ी, ईंट, पत्थर एवं भूसे के ढेर को घर से दूर रखें, चूहों की संख्या नियंत्रित रखें, दरवाजों एवं खिड़कियों की दरारों को बंद रखें।
खेत एवं जंगल में!
खेत में कार्य करते समय ऊंचे जूते (गमबूट) एवं मोटे कपड़े पहनें, हाथों में दस्तानों का उपयोग करें, घास, लकड़ी या पत्थर उठाने से पहले डंडे से जांच लें, झाड़ियों में बिना देखे हाथ न डालें, रात्रि के समय हमेशा टॉर्च का उपयोग करें, नंगे पैर बाहर न निकलें, बच्चों को अंधेरे में अकेले बाहर न भेजें, फर्श पर सोने से बचें। यदि आवश्यक हो तो मच्छरदानी का प्रयोग करें।

सर्पदंश होने पर तुरंत क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराएं नहीं।
✔ मरीज को शांत रखें।
✔ अनावश्यक चलने-फिरने से रोकें।
✔ काटे गए अंग को स्थिर रखें।
✔ तुरंत 108 एम्बुलेंस या उपलब्ध वाहन से निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचाएं।
✔ यदि संभव हो तो सांप का रंग एवं आकार याद रखें, लेकिन उसे पकड़ने या मारने का प्रयास बिल्कुल न करें।
✔ मरीज को शीघ्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं।
सर्पदंश होने पर क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए?
❌ झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के चक्कर में समय बर्बाद न करें।
❌ काटे गए स्थान को ब्लेड या चाकू से न काटें।
❌ जहर चूसने का प्रयास न करें।
❌ बहुत कसकर रस्सी या कपड़ा न बांधें।
❌ मिट्टी, हल्दी, गोबर, तेल, रसायन या किसी भी घरेलू पदार्थ का प्रयोग न करें।
❌ शराब या अन्य नशीले पदार्थ न दें।
सर्पदंश के सामान्य लक्षण!
काटे गए स्थान पर दर्द या सूजन, दो दांतों के निशान दिखाई देना, आंखों की पलकों का झुकना, बोलने या निगलने में कठिनाई, सांस लेने में परेशानी, उल्टी, चक्कर या अत्यधिक कमजोरी, रक्तस्राव या बेहोशी, ऐसे किसी भी लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना आवश्यक है।
अंधविश्वास नहीं, वैज्ञानिक उपचार अपनाएं!
सीएमएचओ ने नागरिकों से विशेष आग्रह किया है कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक, तांत्रिक उपचार या घरेलू नुस्खों पर विश्वास न करें। ऐसे उपायों में समय नष्ट होने से मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। सर्पदंश का प्रभावी उपचार केवल अस्पताल में उपलब्ध वैज्ञानिक चिकित्सा एवं एंटी स्नेक वेनम (ASV) द्वारा ही संभव है।
जनसहभागिता की अपील!
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूलों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव एवं समय पर उपचार के संबंध में जन-जागरूकता अभियान चलाएं तथा प्रत्येक नागरिक तक सही जानकारी पहुंचाएं।
जिला प्रशासन, रतलाम का संदेश!
सतर्क रहें- सुरक्षित रहें, सर्पदंश की स्थिति में घबराएं नहीं, झाड़-फूंक में समय न गंवाएं, बल्कि तत्काल निकटतम शासकीय अस्पताल पहुंचें। समय पर उपचार ही जीवन की सबसे बड़ी सुरक्षा हैं!






