मोतीलाल दायमा हैं इंदौर के अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर

मोतीलाल दायमा हैं इंदौर के अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर

मीडियावाला.इन। 

 मध्यप्रदेश पुलिस के कांस्टेबल, हनुमान जी के भक्त और मिस्टर इंदौर रह चुके मोतीलाल दायमा एक बेहद लोकप्रिय शख्सियत हैं।  कुछ अख़बार उन्हें आयरनमैन भी लिखते हैं, पर वे हैं एकदम बेहद विनम्र, हंसमुख और मेहनती व्यक्ति। रोजाना मीलों दौड़ना और हर दिन कम से कम पांच घंटे रोज जिम में पसीना बहाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। साधनों के अभाव और उपेक्षा के कारण उन्हें कई अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में योग्यता होने  के बाद भी वंचित रहना पड़ा है। बॉडी बिल्डिंग के क्षेत्र में समय देने के कारण वे अब भी कांस्टेबल ही हैं और आगे की प्रमोशन की परीक्षाएं नहीं दे पाते हैं। 

  मोतीलाल दायमा का कहना है कि मैं रोजाना 8000 से लेकर 9000 कैलोरी खर्च करता हूँ। जाहिर है इसके लिए मुझे स्पेशल डाइट भी लेनी होती है। साथ में प्रोटीन की भी जरुरत पड़ती है।  जिम में इतनी मेहनत करता हूँ कि इसके लिए अच्छा और पर्याप्त भोजन भी करना होता है। मेरे भोजन में करीब एक किलो मीट, एक किलो चिकन, 15 से 20 अंडे, आधा किलो मछली, एक पाँव किलों सूखे मेवे और करीब चार किलो दूध शामिल है। इससे भी पेट नहीं भरता तो इस मौसम में मक्का के भुट्टे उबाल और सेंककर खाता हूँ। दिन का काफी वक़्त कसरत में और कई घंटे खाने में खर्च करना पड़ते हैं। 

 

  मोतीलाल दायमा ने बी-एससी तक पढाई की है। धार जिले के गांव से जब इंदौर आये थे, तब उनका वज़न 60 किलो भी नहीं था, लगातार मेहनत और जिम में कसरत और खानपान पर ध्यान देने के कारण उन्होंने अपना वज़न 110 किलो तक बढ़ा लिया था, लेकिन अब वज़न घटकर 92 किलो ही रह गया है।  उनके परिवार पर करीब 12 लाख रुपये का क़र्ज़ भी चढ़ गया है क्योंकि पुलिस की नौकरी में करीब 20 हजार रुपये हाथ में आते हैं, जबकि उनकी डायट का खर्च ही करीब 60 000 रुपये महीना है। घर के जेवरात और जमीन बिक गई,  लेकिन परिवार ने उन्हें आगे बढ़ने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी। सरकार की तरफ से उन्हें एक चीज़ जमकर मिली -- वह है आश्वासन पर आश्वासन, वादे पर वादे और लिखवा  रखी हैं अर्जियों पर अर्जियां, जो आगे बढ़ने का नाम नहीं ले रही। 

    लगता है कि मध्यप्रदेश सरकार की तमाम योजनाएं केवल दिखावे और वोटरों को प्रभावित करें के लिए ही हैं। खेल के नाम पर सरकार में एक विभाग भी है।  युवा कल्याण के नाम पर भी एक विभाग है, लेकिन मोतीलाल दायमा के किस काम का? इंदौर शहर में आये दिन हो रहे आयोजनों पर लोग लाखों रुपये उड़ा देते हैं, जन्मदिन पार्टियों, शादियों में लाखों खर्च हो जाते हैं, लेकिन ऐसी प्रतिभाओं को स्पांसर करें की ललक किसी में नहीं है. 

क्या कोई है जो आगे आकर  और इंदौर के अर्नोल्ड श्वार्ज़नेगर की मदद कर सके? जवाब का इंतज़ार है। 
 

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डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी जाने-माने पत्रकार और ब्लॉगर हैं। वे हिन्दी में सोशल मीडिया के पहले और महत्वपूर्ण विश्लेषक हैं। जब लोग सोशल मीडिया से परिचित भी नहीं थे, तब से वे इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। पत्रकार के रूप में वे 30 से अधिक वर्ष तक नईदुनिया, धर्मयुग, नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर आदि पत्र-पत्रिकाओं में कार्य कर चुके हैं। इसके अलावा वे हिन्दी के पहले वेब पोर्टल के संस्थापक संपादक भी हैं। टीवी चैनल पर भी उन्हें कार्य का अनुभव हैं। कह सकते है कि वे एक ऐसे पत्रकार है, जिन्हें प्रिंट, टेलीविजन और वेब मीडिया में कार्य करने का अनुभव हैं। हिन्दी को इंटरनेट पर स्थापित करने में उनकी प्रमुख भूमिका रही हैं। वे जाने-माने ब्लॉगर भी हैं और एबीपी न्यूज चैनल द्वारा उन्हें देश के टॉप-10 ब्लॉगर्स में शामिल कर सम्मानित किया जा चुका हैं। इसके अलावा वे एक ब्लॉगर के रूप में देश के अलावा भूटान और श्रीलंका में भी सम्मानित हो चुके हैं। अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय में उन्होंने हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर अपना शोध पत्र भी पढ़ा था। हिन्दी इंटरनेट पत्रकारिता पर पीएच-डी करने वाले वे पहले शोधार्थी हैं। अपनी निजी वेबसाइट्स शुरू करने वाले भी वे भारत के पहले पत्रकार हैं, जिनकी वेबसाइट 1999 में शुरू हो चुकी थी। पहले यह वेबसाइट अंग्रेजी में थी और अब हिन्दी में है। 


डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी ने नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर एक किताब भी लिखी, जो केवल चार दिन में लिखी गई और दो दिन में मुद्रित हुई। इस किताब का विमोचन श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के एक दिन पहले 25 मई 2014 को इंदौर प्रेस क्लब में हुआ था। इसके अलावा उन्होंने सोशल मीडिया पर ही डॉ. अमित नागपाल के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक किताब पर्सनल ब्रांडिंग, स्टोरी टेलिंग एंड बियांड भी लिखी है, जो केवल छह माह में ही अमेजॉन द्वारा बेस्ट सेलर घोषित की जा चुकी है। अब इस किताब का दूसरा संस्करण भी आ चुका है।