मां से मिलाने की कोशिशें थमीं, तेंदुआ शावक में CDV संक्रमण के लक्षण; 3 रात इंतजार के बाद भी नहीं लौटी मां  

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मां से मिलाने की कोशिशें थमीं, तेंदुआ शावक में CDV संक्रमण के लक्षण; 3 रात इंतजार के बाद भी नहीं लौटी मां

बड़वानी:मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में खेत से रेस्क्यू किए गए दो माह के मादा तेंदुआ शावक को उसकी मां से मिलाने के प्रयास फिलहाल रोक दिए गए हैं। शावक में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) संक्रमण के गंभीर लक्षण दिखाई देने के बाद वन विभाग और वन्यजीव चिकित्सकों ने यह निर्णय लिया है।

वन विभाग ने पिछले तीन दिनों तक शावक को उसके रेस्क्यू स्थल पर रात के समय रखकर मां से रियूनियन कराने का प्रयास किया। लेकिन लगातार तीन रात इंतजार के बावजूद मां तेंदुआ अपने शावक को लेने नहीं पहुंची।

बड़वानी के डीफओ (वनमंडलाधिकारी) आशीष बंसोड़ ने बताया कि सोमवार, मंगलवार और बुधवार की रात शावक को गोलाटा गांव के उस खेत में रखा गया, जहां वह 8 जून को कमजोर हालत में मिला था। पूरे क्षेत्र की निगरानी नाइट विजन कैमरों से की गई। बुधवार रात लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में थर्मल ड्रोन से भी खोजबीन की गई, लेकिन न तो मां तेंदुआ और न ही उसके अन्य दो शावकों का कोई पता चल सका।

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उन्होंने बताया कि आसपास के ग्रामीणों से भी जानकारी ली गई, लेकिन किसी ने मादा तेंदुआ व उसके दो शावक या हाल के दिनों में किसी मवेशी के शिकार की सूचना नहीं दी। ऐसे में संभावना है कि मां अपने बाकी शावकों के साथ क्षेत्र से काफी दूर चली गई हो।

इधर शावक की तबीयत ने वन विभाग की चिंता और बढ़ा दी है। वन्यजीव विशेषज्ञ एवं पशु चिकित्सक डॉ. महेंद्र बघेल ने बताया कि मंगलवार और बुधवार की रात शावक को बार-बार दौरे (सीजर) आए तथा उसमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण से मेल खाते स्पष्ट लक्षण दिखाई दिए।

उन्होंने बताया कि संक्रमण की पुष्टि के लिए रक्त नमूने जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय की वन्यजीव फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट आने तक शावक का उपचार स्थापित पशु चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा है। उसे अंतःशिरा द्रव (आईवी फ्लूड), मल्टीविटामिन और द्वितीयक संक्रमण रोकने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं।

डॉ. बघेल ने बताया कि गुरुवार दिनभर शावक की स्थिति स्थिर रही। उन्होंने एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग आठ वर्ष पहले बावनगजा क्षेत्र से मिला एक महीने का नर तेंदुआ शावक भी इसी तरह के लक्षणों से ग्रसित था और बाद में उसमें सीडीवी संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उचित उपचार के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया था।

उन्होंने बताया कि संक्रमण की आशंका के कारण फिलहाल शावक को किसी चिड़ियाघर या बड़े वन्यजीव उपचार केंद्र में भी नहीं भेजा जा सकता, क्योंकि इससे अन्य वन्यजीवों में संक्रमण फैलने का खतरा है। अब उसकी आगे की देखभाल और प्रबंधन को लेकर निर्णय जांच रिपोर्ट मिलने के बाद लिया जाएगा।

गौरतलब है कि गोलाटा गांव के एक खेत में ग्रामीणों को यह मादा तेंदुआ शावक अत्यंत कमजोर अवस्था में मिला था। वन विभाग द्वारा उसका उपचार किया जा रहा था और हर शाम करीब 30 किलोमीटर दूर रेस्क्यू स्थल पर ले जाकर मां से मिलाने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन मां के नहीं लौटने और अब संक्रमण की आशंका के चलते यह प्रयास फिलहाल रोक दिए गए हैं।