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किरायेदार चाहे 50 साल से रह रहा हो, घर हमेशा मालिक का ही रहेगा..? सुप्रीम कोर्ट का क्या है फैसला- जानिए सच

Supreme Court on SIR Case:

किरायेदार चाहे 50 साल से रह रहा हो, घर हमेशा मालिक का ही रहेगा..? सुप्रीम कोर्ट का क्या है फैसला- जानिए सच

New Delhi: सोशल मीडिया पर तेजी से यह दावा फैलाया जा रहा है कि “किरायेदार चाहे 50 साल से रह रहा हो, घर हमेशा मालिक का ही रहेगा”- मानो सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई स्पष्ट आदेश दिया हो। लेकिन जांच में सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ऐसा कोई निर्णय नहीं दिया है। हां, अदालत ने अपने कई फैसलों में यह जरूर कहा है कि लंबे समय तक किराये पर रहना किसी को संपत्ति का स्वामी नहीं बना देता।

क्या कहा है सुप्रीम कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट और कई उच्च न्यायालयों ने वर्षों से एक सिद्धांत पर ज़ोर दिया है-
“Once a tenant, always a tenant.” यानी जब कोई व्यक्ति किसी मकान में किरायेदार के रूप में रहता है, तो वह कितना भी समय बीता ले, स्वामित्व का अधिकार अपने आप नहीं पा सकता। किरायेदारी हमेशा मालिक की अनुमति पर आधारित होती है और वह “permissive possession” मानी जाती है, न कि “adverse possession”।

’50 साल’ वाला दावा कहाँ से आया

सोशल मीडिया पर जो बयान वायरल हुआ है- “50 साल बाद भी घर मालिक का ही रहेगा” वह दरअसल सुप्रीम कोर्ट और कुछ हाईकोर्ट के पुराने फैसलों के गलत सार पर आधारित है।

कई मामलों में अदालतों ने यह कहा कि “लंबी अवधि तक किरायेदारी” स्वामित्व का अधिकार नहीं देती, पर इसे कुछ लोगों ने गलत तरीके से “50 साल का आदेश” बताकर प्रसारित कर दिया।

अदालतों का स्पष्ट रुख

1. मालिक का अधिकार सुरक्षित रहता है- जब तक संपत्ति पर किरायेदार का कब्जा किराये या अनुमति के आधार पर है, वह मालिक का अधिकार नहीं खत्म करता।
2. एडवर्स पजेशन (विरोधी कब्ज़ा) का दावा तभी संभव है जब किरायेदार का कब्जा अवैध, खुला और मालिक के विरोध में हो- जो किरायेदारी में नहीं माना जाता।
3. बोना फाइड आवश्यकता (Bona fide requirement) सिद्ध होने पर मकान मालिक को किरायेदार से मकान वापस पाने का अधिकार है।

वैज्ञानिक और कानूनी दृष्टि से कारण

कानूनी रूप से संपत्ति का स्वामित्व केवल दो तरह से मिलता है-
(1) कानूनी हस्तांतरण (बिक्री, वसीयत, उत्तराधिकार इत्यादि से),
(2) या एडवर्स पजेशन (12 साल या उससे अधिक अवैध कब्ज़े के आधार पर)। किरायेदारी इन दोनों में नहीं आती। इसलिए भले ही किरायेदार 50 या 100 साल रहे, उसका स्वामित्व नहीं बनता।

सोशल मीडिया पर अफवाह क्यों फैली

कई यूट्यूब चैनलों और पोस्टों में पुराने केसों का संदर्भ तो लिया गया, लेकिन उनका सारांश अधूरा और भ्रामक रूप में प्रस्तुत किया गया।

वास्तव में सुप्रीम कोर्ट का रुख हमेशा संतुलित और तथ्यपरक रहा है- वह किरायेदारों के अधिकारों की भी रक्षा करता है, लेकिन मालिक का स्वामित्व नहीं खत्म करता।