
‘मैं कहीं भरत तिवारी न बन जाऊं…’ पोस्टर चिपकाकर SP कार्यालय पहुंचा युवक, मंत्री के भाई और पुलिस पर लगाए झूठे केस के आरोप..
‘पुलिस मुर्दाबाद’ के लगाए नारे, राजनीतिक दबाव में कार्रवाई का आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग, पुलिस का पक्ष आना बाकी..
छतरपुर: पुलिस पर झूठे मुकदमे में फंसाने और राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को गौरिहार थाना क्षेत्र के मनुरिया गांव निवासी रविकुमार अहिरवार ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया। युवक अपने शरीर पर पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी का पोस्टर चिपकाकर और हाथों में तख्तियां लेकर SP कार्यालय पहुंचा। इस दौरान उसने “पुलिस मुर्दाबाद” और “गौरिहार थाना पुलिस मुर्दाबाद” के नारे लगाए।

युवक का आरोप है कि उसके खिलाफ राजनीतिक दबाव में झूठे प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं। उसने आरोप लगाया कि चंदला विधानसभा से विधायक एवं प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार के बड़े भाई अशोक अहिरवार सहित कुछ अन्य लोगों के प्रभाव में आकर गौरिहार पुलिस उसे प्रताड़ित कर रही है। उसका कहना है कि केवल उसे ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अन्य लोगों को भी इसी तरह परेशान किया जाता है।

रविकुमार ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में कहा है कि उसके खिलाफ पहले भी विभिन्न धाराओं में मामले दर्ज कराए गए थे और 23 जून को एक बार फिर झूठा प्रकरण दर्ज कराया गया। उसने लिखा कि उसकी मां विधवा हैं और लगातार हो रही कार्रवाई से वह मानसिक रूप से परेशान है।
आवेदन में उसने कहा कि यदि सभी मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वह या तो आत्महत्या करने को मजबूर होगा या फिर “भरत तिवारी” जैसा बनने की नौबत आ जाएगी। उसने पुलिस से निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।

युवक ने यह भी दावा किया कि वह इस मामले में पहले भी थाना, क्षेत्रीय अधिकारियों और SP कार्यालय में आवेदन दे चुका है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उसका कहना है कि पिछले तीन दिनों से वह अपने घर भी नहीं जा पा रहा है क्योंकि उसे और झूठे मामलों में फंसाए जाने तथा जान का खतरा बना हुआ है।
रविकुमार ने 23 और 24 जून को दिए गए अपने आवेदनों का भी हवाला देते हुए आरोप लगाया कि गांव के कुछ लोगों ने उसके साथ गाली-गलौज की, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और जान से मारने की धमकी दी। उसने यह भी दावा किया कि थाने में शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और CCTV फुटेज की जांच की मांग की।
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।





