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फर्जी नियुक्ति पत्र बनाने वाली गैंग के 2 आरोपियों की तलाश, एक महिला पहले ही हो चुकी है गिरफ्तार

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फर्जी नियुक्ति पत्र बनाने वाली गैंग के 2 आरोपियों की तलाश, एक महिला पहले ही हो चुकी है गिरफ्तार

भोपाल: राजधानी भोपाल में अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर ठगी के मामले में गिरफ्तार प्रमिला तिवारी के फर्जीवाडें के मामले में पुलिस को दो आरोपियों की तलाश है। इतना ही नहीं करीब आधा दर्जन आवेदक भी थाने पहुंच गए हैं। जिसकी पड़ताल भी पुलिस ने शुरू कर दी है।
इस गैंग ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर भोपाल, रीवा, जबलपुर, बैतूल और सतना के बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपए की ठगी की है। इसके लिए प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पुलिस के पास फोन भी आ रहे हैं। गिरोह कथित तौर पर वन विभाग, रेलवे, एसबीआई, पीडब्ल्यूडी, एम्स और नगर निगम जैसे विभागों के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर युवाओं को नौकरी का झांसा देता था।
जांच में सामने आया है कि भोपाल के नवीन सौंधिया को वन विभाग का फर्जी नियुक्ति पत्र देकर 1997 बैच का आईएफएस अधिकारी और मुख्य वन संरक्षक दशार्या गया, जबकि राजीव विश्वकर्मा को एसबीआई में क्लर्क की नौकरी का भरोसा दिलाया गया। रीवा निवासी राकेश दुबे की बेटी से पांच लाख रुपए लेकर पीडब्ल्यूडी मंत्री के हस्ताक्षर वाला कथित नियुक्ति पत्र सौंपा गया था। वहीं जबलपुर के हिमांशु और प्रियांशु, बैतूल की राधा तथा सतना के रविशंकर शर्मा को भी अलग-अलग विभागों में नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी दस्तावेज दिए गए।
पुलिस के मुताबिक गिरोह युवाओं का भरोसा जीतने के लिए सरकारी दफ्तरों के बाहर मुलाकात करता था। वहां पहले से मौजूद लोग खुद को नौकरी लग चुका कर्मचारी बताकर विश्वास दिलाते थे। करोंद निवासी राहुल विश्वकर्मा और नवीन सौंधिया से नगर निगम में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए लिए गए और उन्हें डेढ़ महीने तक सर्वे कार्य भी कराया गया ताकि पूरी प्रक्रिया असली लगे। पुलिस इस मामले में प्रमिला तिवारी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जबकि अनूप और प्रवीण की पुलिस को तलाश है। दोनों आरोपी फर्जी दस्तावेज बनाने में माहिर थे, इसलिए पुलिस अब उनकी तलाश में जुटी हुई है।