
देशभर के प्रेस क्लबों ने बनाया राष्ट्रीय संगठन- ‘फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स’,गौतम लाहिड़ी अध्यक्ष बने, 10 सदस्यीय गवर्निंग काउंसिल में इंदौर के प्रवीण खारीवाल शामिल
नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख प्रेस क्लबों ने मिलकर पत्रकारों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। देशभर के आठ प्रमुख प्रेस क्लबों ने संयुक्त रूप से ‘फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स’ (FPC) नामक एक गैर-राजनीतिक राष्ट्रीय संगठन का गठन किया है।
फेडरेशन का उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा, पत्रकारों की सुरक्षा, मीडिया कर्मियों के कल्याण तथा उनके पेशेवर विकास से जुड़े मुद्दों पर सदस्य संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करना और सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना है।
फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स का पंजीकरण सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत कराया गया है। इस पहल के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय और प्रतिनिधिक प्रेस क्लबों को एक साझा राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों की आवाज को अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सके।
*ये हैं फेडरेशन के संस्थापक सदस्य*
फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स के आठ संस्थापक सदस्य हैं—
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया
मुंबई प्रेस क्लब
प्रेस क्लब, कोलकाता
प्रेस क्लब, हैदराबाद
चंडीगढ़ प्रेस क्लब
स्टेट प्रेस क्लब, मध्य प्रदेश
गुवाहाटी प्रेस क्लब
अगरतला प्रेस क्लब
*10 सदस्यीय गवर्निंग काउंसिल का गठन*
फेडरेशन के संचालन के लिए 10 सदस्यीय गवर्निंग काउंसिल का गठन किया गया है। इसमें—
गौतम लाहिड़ी – अध्यक्ष (पूर्व अध्यक्ष, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया)
स्नेहाशीष सुर – उपाध्यक्ष (अध्यक्ष, प्रेस क्लब कोलकाता)
समर खदास – उपाध्यक्ष (अध्यक्ष, मुंबई प्रेस क्लब)
विजय रेड्डी – उपाध्यक्ष (अध्यक्ष, प्रेस क्लब हैदराबाद)
सौरभ दुग्गल – महासचिव (अध्यक्ष, चंडीगढ़ प्रेस क्लब)
संगीता बरुआ पिशारोटी – सहायक महासचिव (अध्यक्ष, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया)
नीरज ठाकुर – कोषाध्यक्ष (पूर्व महासचिव, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया)
*प्रवीण खारीवाल – कार्यकारी सदस्य (अध्यक्ष, स्टेट प्रेस क्लब, मध्य प्रदेश)*
प्रणब सरकार – कार्यकारी सदस्य (अध्यक्ष, अगरतला प्रेस क्लब)
कागेन कलिता – कार्यकारी सदस्य (अध्यक्ष, गुवाहाटी प्रेस क्लब)
फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स के गठन को देश के पत्रकार संगठनों के बीच बेहतर तालमेल, साझा मुद्दों पर एकजुटता और मीडिया की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





