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Protest Against Instructions : कमिश्नर के डॉक्टरों को ओपीडी से फोटो भेजने के निर्देश का विरोध!

'एमटीए' ने कहा 'यह निजता का हनन, नियम में नहीं आता!'

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Protest Against Instructions : कमिश्नर के डॉक्टरों को ओपीडी से फोटो भेजने के निर्देश का विरोध!

Indore : कमिश्नर मालसिंह भयड़िया जब से शहर में पदस्थ हुए हैं, वे सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। ओपीडी में डॉक्टरों के समय पर न आने की शिकायतें लगातार बनी हुई है। ऐसी स्थिति में कमिश्नर ने सुबह साढ़े 8 बजे अस्पताल की ओपीडी से फोटो खींचकर भेजने के निर्देश दिए, तो उसका भी विरोध किया गया।

कमिश्नर ने कई बार एमवाय समेत कई सरकारी अस्पतालों का दौरा किया है। इसके बाद भी इन अस्पतालों की व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा। इस दौरान कमिश्नर डॉक्टरों को लापरवाही के लिए नोटिस भी दे चुके और एमटीएच अस्पताल के प्रभारी को हटाने की कार्रवाई भी की गई। लेकिन, कमिश्नर के दौरे से मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) शुरूआत से नाराज चल रहा है। वह कई बार विरोध स्वरूप बैठक कर चुका है।

हाल ही में कमिश्नर ने निर्देश दिए है कि एमजीएम मेडिकल कालेज के सभी अस्पतालों में डाक्टरों को सुबह 8.30 बजे फोटो खींचकर व्हाटसएप ग्रुप में भेजना होगा। जिसके विरोध में सोमवार को एमटीए ने एक बैठक रखी। जिसमें अस्पताल अधीक्षक, प्रभारी सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। यहां चर्चा हुई कि कमिश्नर का काम डॉक्टरों की नियमित गतिविधियां देखने का नहीं है। यह निजता के अधिकार का हनन है और नियमों में भी नहीं आता है। यह सिर्फ एक मौखिक आदेश था, जिसका हम पालन नहीं करेंगे।

उन्होंने कहा कि हमारे मुखिया डीन है। वहीं इसके अलावा एसोसिएशन एक लेटर भी डीन को सौंपने की तैयारी कर रहा है, जिसमें यह बताया जाएगा कि डीन के कार्य क्षेत्र में क्या आता है और कमिश्नर के कार्य क्षेत्र में क्या आता है। एसोसिएशन के सचिव डॉ अशोक ठाकुर ने बताया कि जो प्रशासनिक नियम हमें भोपाल से प्राप्त हुए है, उनमें ऐसा कोई नियम नहीं है। यह हमारी निजता के अधिकार का हनन है। इसके हमने बैठक में निर्णय लिया है कि हम इस मौखिक आदेश को नहीं मानेंगे।

समय पर न आने की शिकायत

ओपीडी में डॉक्टरों के समय पर पहुंचने की शिकायत रही है। ओपीडी के दौरान कई डाक्टर तो निजी अस्पतालों में मौजूद रहते हैं। जिसके कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां बायोमेट्रिक अटेंडेंस की बात करें तो कई डॉक्टर इसे नहीं लगाते हैं। कमिश्नर इस व्यवस्था को सुधारने का प्रयास करते हैं तो इनका विरोध शुरू हो जाता है।