सूर्य नगरी अफजलपुर की -अद्वितीय सूर्य प्रतिमा प्राकट्य दिवस पर विशेष

देवीलाल सुनार्थी शिक्षाविद 

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सूर्य नगरी अफजलपुर की -अद्वितीय सूर्य प्रतिमा प्राकट्य दिवस पर विशेष

प्रस्तुति डॉ घनश्याम बटवाल मंदसौर 

मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले का सूर्य नगर अफजलपुर आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और प्राचीन भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक बन चुका है।

 

21 मई 2014 का वह ऐतिहासिक दिवस आज भी क्षेत्रवासियों के हृदय में श्रद्धा और गौरव के साथ स्मरण किया जाता है, जब अफजलपुर की नई आबादी में खेत की खुदाई के दौरान भगवान सूर्यदेव की अद्भुत, दिव्य एवं पूर्णतः अखंड प्रतिमा प्रकट हुई थी।

 

पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार यह अद्वितीय दुर्लभ प्रतिमा 12वीं शताब्दी में चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित मानी जाती है। प्रतिमा की अद्भुत शिल्पकला, दिव्य मुखाकृति, सूक्ष्म नक्काशी और पूर्णतः अखंड स्वरूप इसे विश्व की अनोखी सूर्य प्रतिमाओं में विशेष स्थान प्रदान करता है। सामान्यतः प्राचीन मूर्तियां खंडित अवस्था में प्राप्त होती हैं, किंतु इतनी विशाल और सुंदर प्रतिमा का पूर्ण अवस्था में मिलना अत्यंत दुर्लभ घटना है।

 

सूर्य नगर अफजलपुर का प्राचीन इतिहास अत्यंत समृद्धशाली रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि जिला पुरातात्विक संग्रहालय मंदसौर में संरक्षित सबसे अधिक प्राचीन मूर्तियां और अवशेष अफजलपुर से प्राप्त हुए हैं। गांव की धरती मानो इतिहास को अपने भीतर संजोए बैठी है। यहां जब भी किसी स्थान पर खुदाई होती है, तब कोई न कोई प्राचीन प्रतिमा, शिल्पखंड या ऐतिहासिक अवशेष अवश्य निकल आता है। स्थानीय जनमानस में यह कहावत प्रसिद्ध है

अफजलपुर में पग-पग पर मूर्तियां निकलती हैं।

 

इतना ही नहीं, गांव में अनेक प्राचीन स्मारक, मंदिर अवशेष तथा ऐतिहासिक छतरियां (Memory Pillars) आज भी विद्यमान हैं, जो इस क्षेत्र के गौरवशाली अतीत की मौन गाथा सुनाती हैं। ये छतरियां उस समय की संस्कृति, स्मृति संरक्षण और स्थापत्य कला की उत्कृष्ट पहचान मानी जाती हैं। जो प्रतिष्ठित लोगों की स्मृतियो ने बनाई गई थी।

गांव के विभिन्न हिस्सों में बिखरे प्राचीन अवशेष यह संकेत देते हैं कि यह क्षेत्र कभी एक विशाल धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र रहा होगा।

 

भारत में सूर्य उपासना की परंपरा अत्यंत प्राचीन और गौरवशाली रही है। कोणार्क जैसे सूर्य मंदिर की परंपरा में सूर्य नगर अफजलपुर की यह दिव्य प्रतिमा भी विशेष महत्व रखती है। प्रतिमा के प्राकट्य के बाद गांव की पहचान बदल गई और आज अफजलपुर “सूर्य नगर” के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है। यह नाम केवल एक भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि क्षेत्र की आध्यात्मिक चेतना, ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन गया है।

 

ग्राम अफजलपुर से प्राप्त अद्वितीय सूर्य प्रतिमा को पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय मध्यप्रदेश द्वारा संरक्षित स्मारक के रूप में दर्ज़ किया हुआ है ।

 

सूर्य प्रतिमा प्राकट्य दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि उस गौरवशाली इतिहास का स्मरण है जो हमें हमारी जड़ों, हमारी संस्कृति और हमारी धरोहरों से जोड़ता है। यह दिवस आने वाली पीढ़ियों को अपनी विरासत के संरक्षण और सम्मान का संदेश देता रहेगा।

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इसके संरक्षण संवर्धन और उपयुक्त मान और गरिमा के साथ स्थापित करने हेतु विचार चल रहे हैं । अभी मंदिर गर्भगृह में विद्यमान है पर आवश्यकता इस अद्वितीय सूर्य प्रतिमा को गरिमा और महत्व के साथ स्थान प्राप्त हो ताकि पहचान के साथ अंचल को ऊंचाई प्राप्त हो सके । इस मामले में उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, पूर्व गृहमंत्री श्री कैलाश चावला ने परस्पर चर्चा की है और प्रख्यात पुरातत्व विद्वान एवं इतिहासकार श्री कैलाश चन्द्र पाण्डेय से सूर्य प्रतिमा का विवरण भी प्राप्त किया गया है ।

सूर्य नगरी अफजलपुर की विशिष्ट पहचान यहां से सैकड़ों युवा भारतीय सेना में विभिन्न क्षेत्रों और स्थानों पर अंचल का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अपने पराक्रम से सूर्य की तरह चमक रहे हैं ।