
राजनीति के लिए फायदेमंद हैं समाजों के ऐसे गैर राजनीतिक कार्यक्रम…
कौशल किशोर चतुर्वेदी
सोलहवीं विधानसभा का लगभग आधा कार्यकाल पूरा होने को है। ऐसे में अब राजनैतिक दलों के मन में मिशन 2028 को लेकर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। राजनैतिक समीकरणों में समाजों का अपना विशेष योगदान प्रभावी रूप से शामिल होता है। और समाजों के दिग्गज नेताओं का भविष्य भी समाज के मतदाता तय करते हैं। राजधानी भोपाल में 28 अप्रैल 2026 को जम्बूरी मैदान में हुआ लोधी समाज का एक बड़ा आयोजन इसी संदर्भ में देखा जा सकता है। पर इस कार्यक्रम की बड़ी विशेषता यह थी कि इसे समाज के इर्द-गिर्द गैर राजनीतिक तानेबाने के साथ बुना गया था। और मंच पर आसीन प्रमुख नेताओं में लोधी समाज के भाजपा और कांग्रेस के विधायक और सरकार में कद्दावर मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और धर्मेन्द्र लोधी शामिल थे। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती भी कार्यक्रम में पहुंची। हालांकि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उमा जी के जाने के बाद कार्यक्रम में शामिल हुए। इस सबके राजनतिक मायने जिसको निकालना हो वह निकालने को स्वतंत्र है। लेकिन यह बात सही है कि इस गैर राजनीतिक और शुद्ध सामाजिक कार्यक्रम में खुद मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने मंच से कहा कि समाज के इस कार्यक्रम का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। और यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह आह्वान किया था कि समाजों के उन गुमनाम नायकों को तलाशा जाना चाहिए, जो बड़े बलिदान देकर गए हैं, लेकिन उन्हें कोई नहीं जानता। तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास विजन की चर्चा मंच से जरूर की। हालांकि, गनीमत रही कि बात भाजपा और कांग्रेस सरकारों के बीच तुलना तक नहीं पहुंची। इस सबके बावजूद इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि समाज विशेष के ऐसे गैर राजनैतिक कार्यक्रम भी राजनीति के लिए तो फायदेमंद ही होते हैं। इसमें समाज विशेष की एकता का ठोस प्रदर्शन कहीं न कहीं राजनीति में सक्रिय नेताओं को मजबूत तो बनाता ही है। उनकी दावेदारी का पलड़ा भी भारी करता है। तो कार्यक्रम को भव्य आकार देने वाले लोधी-लोधा समाज के प्रदेशाध्यक्ष जालम सिंह पटेल के नेतृत्व में हुआ लोधी समाज का यह एकत्रीकरण, निगम-मंडल नेताओं की घोषणा के दौरान राजनैतिक मायनों की पूर्ति करने में भी सक्षम तो माना ही जा सकता है।
खैर लोधी समाज का यह आयोजन अपने उद्देश्यों की पूर्ति में भी सफल रहा है। पूरा मध्यप्रदेश अब राजा हिरदेशाह लोधी के बारे में न केवल पढ़ेगा, बल्कि उनकी जीवन यात्रा भी देखेगा।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजा हिरदेशाह लोधी को पाठ्यक्रम में शामिल कराएंगे और उनके नाम से तीर्थ स्थल का भी निर्माण कराएंगे। सीएम डॉ. यादव ने राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि (शौर्य दिवस) के अवसर पर उन्हें नमन किया। उन्होंने 28 अप्रैल को राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आज का यह दिन पवित्र दिन है। कई योनियों के बाद मनुष्य जन्म मुश्किल से मिलता है। नर्मदा टाइगर के नाम से पहचान रखने वाले राजा हिरदेशाह ने अंग्रेज शासन के खिलाफ 1842 में संघर्ष का संकल्प लिया। वे अपने भाइयों के साथ 1858 तक संघर्ष करते रहे। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राजा हिरदेशाह का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी और आदर्श है। समाज के महापुरुषों के संघर्ष को भी याद करने की आवश्यकता है। जो संघर्षों से लड़ना जानता है, समाज उसका अभिनंदन करता है। राजा हिरदेशाह ने बुंदेलखंड के बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट कर अंग्रेजों के समाने आंदोलन शुरू किया था। राज्य सरकार उनके संघर्ष पर शोध कराएगी। उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रम को लिपिबद्ध कर शिक्षा विभाग में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा। इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ फिर से खुलने चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी की युद्ध शैली छत्रपति शिवाजी महाराज के समान थी। उन्होंने युवाओं को साहस और आत्मबल के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज सामर्थ्यवान है। इस समाज के सदस्यों ने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया। समाज के युवाओं को साहसी, शक्तिमान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है। हमारा संकल्प समाज के साथ है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आह्वान पर देशभर में गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को पहचान दिलाने का कार्य तेज हुआ है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
कार्यक्रम में उपस्थित दादा गुरु ने कहा कि आज राष्ट्र को गौरवान्वित करने वाला क्षण है। उन्होंने महत्वपूर्ण बात कही कि राजा हिरदेशाह ने बुंदेलों, आदिवासियों और सकल समाज को एकजुट कर राष्ट्र के लिए लड़ने को तैयार किया था। आयोजन का एक अच्छा पक्ष यह रहा कि इसमें विशेष रूप से वीर राजा हिरदेशाह लोधी के वंशज राजा कौशलेंद्र सिंह, ढिलवार के राजा नरवरशाह के वंशज रामकुमार सिंह तथा डेलनशाह की वंशज रंजीता सिंह का सम्मान किया गया। इस आयोजन में मध्यप्रदेश सहित उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
तो फिर वही बात कि कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसमें विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि एक साथ उपस्थित रहे। यह आयोजन पूर्णतः सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप का रहा, जिसमें लोधी, गोंड, आदिवासी, ठाकुर सहित विभिन्न समाजों ने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ सहभागिता निभाई। और कहीं न कहीं इस भव्य आयोजन से यह संदेश जाता रहा कि लोधी लोधा समाज के वजूद को कम करके नहीं आंका जा सकता। गैर राजनीतिक कार्यक्रम में भी सैकड़ों राजनैतिक मायने छिपे हुए नजर आ सकते हैं। तब भी मंच की भव्यता लोधी लोधा समाज की एकता को प्रदर्शित करने में सफल रही है। और लगता है कि लोधी लोधा समाज की तरह ही अब मध्य प्रदेश की राजधानी का जम्बुरी मैदान अन्य समाजों के ऐसे कार्यक्रमों का भी साक्षी बनता नजर आएगा…।
लेखक के बारे में –
कौशल किशोर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पिछले ढ़ाई दशक से सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों व्यंग्य संग्रह “मोटे पतरे सबई तो बिकाऊ हैं”, पुस्तक “द बिगेस्ट अचीवर शिवराज”, ” सबका कमल” और काव्य संग्रह “जीवन राग” के लेखक हैं। वहीं काव्य संग्रह “अष्टछाप के अर्वाचीन कवि” में एक कवि के रूप में शामिल हैं। इन्होंने स्तंभकार के बतौर अपनी विशेष पहचान बनाई है।
वर्तमान में भोपाल और इंदौर से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र “एलएन स्टार” में कार्यकारी संपादक हैं। इससे पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एसीएन भारत न्यूज चैनल में स्टेट हेड, स्वराज एक्सप्रेस नेशनल न्यूज चैनल में मध्यप्रदेश संवाददाता, ईटीवी मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ में संवाददाता रह चुके हैं। प्रिंट मीडिया में दैनिक समाचार पत्र राजस्थान पत्रिका में राजनैतिक एवं प्रशासनिक संवाददाता, भास्कर में प्रशासनिक संवाददाता, दैनिक जागरण में संवाददाता, लोकमत समाचार में इंदौर ब्यूरो चीफ दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। नई दुनिया, नवभारत, चौथा संसार सहित अन्य अखबारों के लिए स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर कार्य कर चुके हैं।





