प्रदेश में कम हुए 78 ब्लैक स्पॉट, अनूपपुर, रतलाम ने घटाए तो टीकमगढ़ में बढ़ गए ब्लैक स्पॉट

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प्रदेश में कम हुए 78 ब्लैक स्पॉट, अनूपपुर, रतलाम ने घटाए तो टीकमगढ़ में बढ़ गए ब्लैक स्पॉट

भोपाल : किसी भी शहर में सड़क दुर्घटनाओं के पीछे ब्लैक स्पाट की बड़ी भूमिका होती है। पिछले एक साल में लोक निर्माण विभाग,एमपीआरडीसी,परिवहन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त मुहिम से पूरे प्रदेश में 78 ब्लैक स्पॉट समाप्त कर दिए गए है। ब्लैक स्पॉट कम करने के मामले में अनूपपुर जिला प्रदेश में सबसे अव्वल है। यहां सात ब्लैक स्पॉट समाप्त हो गए है। इसके बाद रायसेन दूसरे स्थान पर है यां छह ब्लैक स्पॉट समाप्त हो गए है। वहीं टीकमगढ़ जिले में स्थिति अलग है। यहां ब्लैक स्पॉट घटने के बजाय बढ़ गए है। पिछले एक साल में यहां सोलह ब्लैक स्पॉट बढ़ गए है।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले साल सोलह ब्लैक स्पॉट थे इनमें से पांच ब्लैक स्पॉट कम हो गए है। भोपाल ग्रामीण में पिछले साल आठ ब्लैक स्पॉट थे इनकी संख्या इस साल बढ़कर नौ हो गई है। इंदौर में सोलह ब्लैक स्पॉट थे ये सभी समाप्त कर दिए गए है। वहीं इंदौर ग्रामीण में सोलह में से पंद्रह ब्लैक स्पॉट समाप्त कर दिए गए है अब यहां केवल एक ब्लैक स्पॉट बचा है। ग्वालियर में छह ब्लैक स्पॉट थे इन सभी ब्लैक स्पॉट को खत्म कर ग्वालियर अब बिना ब्लैक स्पॉट वाला जिला बन गया है।अनूपपुर में 11 ब्लैक स्पॉट थे यहां सात ब्लैक स्पॉट कम हो गए है। संस्कारधानी जबलपुर में सर्वाधिक 47 ब्लैक स्पॉट थे। जबलपुर में छह ब्लैक स्पॉट घटे है अब यहां केवल 41 ब्लैक स्पॉट रह गए है।

इन जिलों में कम हुए ब्लैक स्पॉट-भोपाल, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, बैतूल, रायसेन,शिवपुरी, अशोकनगर, भिंड, श्योपुर, इंदौर ग्रामीण,झाबुआ, खरगौन, बड़वानी, रतलाम, जबलपुर, छिंदवाड़ा, पांर्ढुना, नरसिंहपुर, सिवनी,सतना, मऊंगंज,शहडोल, उमरिया, अनुूपपुर, सागर, छतरपुर, निवाड़ी, पन्ना, मंडला
यहां अभी भी सर्वाधिक ब्लैक स्पॉट-
जबलपुर में 41,खरगौन में 24,इंदौर में 16, धार में 18, भोपाल में 11, रायसेन में 13, गुना में 11, शिवपुरी में 10, उज्ज्ैन में 20, देवास में 12, इंदौर ग्रामीण में 15,बड़वानी में 14, देवास में 12, शहडोल में 12, दमोह में 14, टीकमगढ़ में 19

ये होते है ब्लैक स्पॉट-सामान्य तौर पर सड़कों पर जो ब्लैक स्पॉट होते है वे ही दुर्घटना के कारण बनते है। तीखे मोड़ वाले रास्तों पर जहां तेज गति होंने पर सड़क के मोड़ पर चालक को सामने का दृश्य स्पष्ट नहीं दिखता है वहां दुर्घटनाएं ज्यादा होती है। अंधो मोड़ जो ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में अंधो मोड़ होते है जिससे सामने से आ रहे वाहन दिखाई नहीं देते है। चौराहे और तिराहे जहां कई दिशाओं से वाहन आते है और सिग्नल भी नहीं होते वहां दुर्घटना के चांस बढ़ जाते है। रेलवे फाटक के पास जो मानव रहित रेलवे क्रासिंग है या कम दिखाई देने वाले रेलवे क्रासिंग है वहां भी दुर्घटना के मामले बढ़ जाते है। पुल, पुलिया और सकरे मार्ग जहां दोनो ओर बेरिकेड पर्याप्त नहीं होते है वहां भी दुर्घटना बढ़ जाती है खराब गढ्ढेदार सड़के , टूटे किनारे वाली सड़क और बीच में उभरी हुई सड़क, जलभराव वाले स्थान, ढलान और चढ़ाई वाले क्षेत्र में ओवर लोड वाहन, पहाड़ों पर तीव्र ढलान , खराब दृश्यता से दुर्घटनाएं ज्यादा होती है। इसके अलावा भीड़भाड़ वाले बाजार और आबादी क्षेत्र, सड़क संकेत, रिफ्लेक्टर और प्रकाश व्यवस्था कम होंने , स्ट्रीट लाइट न होंने चेतावनी बोर्ड नहीं होंने पर भी दुर्घटनाए बढ़ जाती है। यूटर्न और कट पाइंट भी ब्लैक स्पाट कहलाते है।
सड़कों पर स्पीड नियंत्रण, प्रकाशर, चौड़ी सड़क, क्रेश बेरियर, रंबल स्ट्रिप्स, चेतावनी संकेत यातायात प्रबंधन अपनाकर ब्लैक स्पॉट और दुर्घटनाएं कम की जा ती है।