हाई कोर्ट पहुंची महाकुंभ वायरल गर्ल, NHRC बोला- अब तक नहीं मिला जवाब

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हाई कोर्ट पहुंची महाकुंभ वायरल गर्ल, NHRC बोला- अब तक नहीं मिला जवाब

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से जुड़े चर्चित ‘महाकुंभ वायरल गर्ल’ मामले में नया मोड़ आ गया है। एक ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने खरगोन पुलिस से मांगी गई कार्रवाई रिपोर्ट अब तक नहीं मिलने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर युवती ने अपने अंतरधार्मिक विवाह को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया है।

एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मंगलवार को बड़वानी में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि आयोग को शिकायत मिली थी कि महाकुंभ मेले के दौरान वायरल हुई कथित नाबालिग लड़की का केरल में निकाह कराया गया। शिकायत में कुछ प्रभावशाली लोगों और अधिकारियों की मौजूदगी का भी उल्लेख था। उन्होंने कहा कि बाल विवाह कानूनन अपराध है, इसलिए खरगोन पुलिस को नोटिस जारी कर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन फिलहाल आयोग को जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।

कानूनगो ने कहा कि यदि जांच में किसी राजनेता या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। आयोग ने अप्रैल के पहले सप्ताह में खरगोन पुलिस अधीक्षक को सात दिन में एक्शन टेकन रिपोर्ट देने तथा मध्य प्रदेश और केरल प्रशासन को संयुक्त जांच के निर्देश दिए थे।

शिकायत के अनुसार, महेश्वर की किशोरी ने महाकुंभ मेले के दौरान वायरल वीडियो में अपनी उम्र करीब 16 वर्ष बताई थी। इसके बावजूद उसका विवाह केरल निवासी फरमान खान से कराया गया। शिकायत में उम्र संबंधी दस्तावेजों में गड़बड़ी, गलत जानकारी और दबाव में विवाह कराने जैसी आशंकाएं भी जताई गई थीं।

इधर, अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य को प्राप्त शिकायत की जांच में भी लड़की को नाबालिग बताया गया था। इसके बाद महेश्वर पुलिस ने फरमान खान के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया था।
हालांकि फरमान खान और युवती ने Kerala High Court की शरण ली, जहां अदालत ने फरमान खान की गिरफ्तारी पर 20 मई तक अंतरिम रोक लगा दी थी। खरगोन पुलिस अधीक्षक रवींद्र वर्मा ने कहा कि एनएचआरसी के संबंधित मेंबर और सेक्शन को कार्रवाई रिपोर्ट भेजी जा चुकी है और जांच के लिए पुलिस टीम दो बार केरल जा चुकी है।

वहीं अब युवती ने Madhya Pradesh High Court इंदौर में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि उसके अंतरधार्मिक विवाह को अपराध साबित करने के लिए जन्म प्रमाणपत्र में फर्जी तरीके से बदलाव किया गया। याचिका में मूल जन्म प्रमाणपत्र बहाल करने और सरकारी रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है।