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 पैर का इलाज कराने गए मरीज का कर दिया पेट का ऑपरेशन? CMS ने दिए जांच के आदेश

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 पैर का इलाज कराने गए मरीज का कर दिया पेट का ऑपरेशन? CMS ने दिए जांच के आदेश

लालगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले राजकुमार के पैर में काफी गंभीर अल्सर हो चुका है जिसका इलाज कराने वह बार-बार जिला अस्पताल आता है. इसी क्रम में वह अस्पताल आया जहां पर राजकुमार ने डॉक्टरों पर पैसा मांगने और जबरन पैर का इलाज करने की बजाय पेट का ऑपरेशन करने का गंभीर आरोप लगाया

रायबरेली में एक मरीज ने जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों पर जबरन पेट का ऑपरेशन करने का आरोप लगाया जबकि वह पैर का इलाज कराने जिला अस्पताल गया था. इसकी शिकायत लेकर वह जिलाधिकारी कार्यालय भी पहुंचा जहां से जांच का आश्वासन भी उसे मिला.

लालगंज थाना क्षेत्र के रहने वाले राजकुमार के पैर में काफी गंभीर अल्सर हो चुका है जिसका इलाज कराने वह बार-बार जिला अस्पताल आता है. इसी क्रम में वह अस्पताल आया जहां पर राजकुमार ने डॉक्टरों पर पैसा मांगने और जबरन पैर का इलाज करने की बजाय पेट का ऑपरेशन करने का गंभीर आरोप लगाया.

लापरवाही! पैर का इलाज कराने गया था शख्‍स, डॉक्‍टर ने कर द‍िया पेट का ऑपरेशन; यूपी के रायबरेली का मामला

वहीं जब इस बाबत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ महेंद्र मौर्य से बात की गई तो उन्होंने कहा यह आरोप झूठे हैं. राजकुमार नामक व्यक्ति जिला अस्पताल में इलाज कराने आया था, इसके पहले भी वह कई बार आ चुका है क्योंकि उसके पैर में नॉन हीलिंग अल्सर है. उसको सजेस्ट भी किया गया कि वह केजीएमसी जाकर अपना इलाज करा ले लेकिन वह यहीं बना रहना चाहता है. उसे जब दूसरे वार्ड में भर्ती कर दिया गया तब उसने वहां मौजूद स्टाफ को धमकी देना शुरू कर दिया कि वह अपना पेट फाड़ कर सबको फंसा देगा और उसने वैसा ही किया. वहीं उसने अपने पेट में चीरा लगा लिया जिसकी सूचना हमें प्राप्त हुई. मौके पर सर्जन डॉ प्रदीप सहित अन्य स्टाफ पहुंचा और उसके पेट में टांके लगाए गए और उसका इलाज कराया गया. जैसे ही उसे थोड़ा आराम मिला वह बाहर जाकर झूठे आरोप लगाने लगा जो गलत हैं. फिलहाल मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

इससे पहले बरेली से भी एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया था. यहां पर एक अस्पताल में तुतना ऑपरेशन की जगह ढाई साल के बच्चे का एक डॉक्टर ने खतना कर दिया था. इस मामले के बाद हिंदू संगठनों ने अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाई की मांग को लेकर जमकर हंगामा किया था. वहीं जब यह मामला डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के संज्ञान में आया तो उन्होंने सीएमओ को कमेटी गठित कराने के निर्देश दिए. इसके बाद हॉस्पिटल के लाइसेंस को निलंबित कर दिया गया और ओपीडी बंद करवा दी गईं.