कुख्यात पहचान वाले गांव अब बन रहे विकास की मिसाल:74 किमी पार कर मिंडा पहुंची नर्मदा, वनवासियों ने बदली पहचान

पहली बार बदनाम गांवों ने दिया साथ—7 घंटे में 4 पंपिंग स्टेशनों से सफल ट्रायल; 66 गांवों की 25 हजार हेक्टेयर जमीन को मिलेगा पानी

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कुख्यात पहचान वाले गांव अब बन रहे विकास की मिसाल:74 किमी पार कर मिंडा पहुंची नर्मदा, वनवासियों ने बदली पहचान

अमझेरा से गोपाल खंडेलवाल की ग्राउंड रिपोर्ट

शनिवार शाम 4 बजे का वक्त… और मिंडा का माही उद्गम स्थल इतिहास का गवाह बन गया। आजादी के बाद पहली बार मां नर्मदा का पानी 74 किमी का सफर तय कर माही से मिलने यहां पहुंची । लेकिन इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ पानी नहीं, बल्कि उन कुख्यात जंगलों और गांवों की बदली हुई सोच है, जहां कभी जाने से पुलिस भी कतराती थी।

जामादा-भूतिया जैसे बदनाम इलाकों से गुजरते हुए नर्मदा का पानी बिना किसी रुकावट के मिंडा पहुंचा। पाइपलाइन बिछाने से लेकर पानी पहुंचाने तक, कहीं विरोध नहीं हुआ—बल्कि वनवासियों ने इसे “जीवनदायिनी” मानकर स्वागत किया। जैसे ही पानी पहुंचा, किसानों और ग्रामीणों ने विधिवत पूजन कर जयकारे लगाए।

कुख्यात गांवों की नई पहचान”

इस योजना की सबसे बड़ी सफलता तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव है। जिन गांवों में कभी बदमाशों का खौफ था, वहां अब विकास का साथ दिखा।

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करीब 20 किमी का पाइपलाइन नेटवर्क ऐसे जंगल क्षेत्र से गुजरा, जहां पहले काम करना चुनौती माना जाता था। लेकिन इस बार वनवासी खुद आगे आए और सहयोग किया।कंपनी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक,

“शुरुआत में नाम सुनकर डर था, लेकिन यहां के लोगों ने सोच बदल दी—पूरा काम बिना रुकावट पूरा हुआ।”

यह बदलाव शासन के रिकॉर्ड में भी एक मिसाल बन गया है।

4 पंपिंग स्टेशन, 7 घंटे का सफर”

कंपनी के मैनेजर आनंद सिंह के अनुसार, नर्मदा का पानी कुक्षी के पास चंदनखेड़ी से मिंडा तक 4 पंपिंग स्टेशनों के जरिए लाया गया:

चन्दनखेड़ी 22 किमी,

खंडालाई:18 किमी

काटी: 19 किमी

चुप्पियां के पास: 15 किमी

करीब 7 घंटे में पानी मिंडा की मुख्य टंकी तक पहुंचा। हर स्टेशन पर क्रमवार ट्रायल लिया गया और सभी सफल रहे।

66 गांवों की 25422 हेक्टर भूमि होगी सिंचित”

इंजीनियरों के मुताबिक,12 केजी प्रेशर से पानी टंकी तक लाया गया9 केजी प्रेशर से ट्रायल सफल रहा

इस योजना से सरदारपुर क्षेत्र के 66 गांवों की 25,422 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। आने वाले दिनों में माही नदी में नर्मदा का पानी छोड़ने का अगला ट्रायल भी प्रस्तावित है।पहली बार पानी के लिए साथ आए वनवासी

अब तक इन इलाकों में सड़क और बिजली पहुंची थी, लेकिन पानी के लिए ऐसा सामूहिक सहयोग पहली बार देखने को मिला।

कुख्यात पहचान वाले गांव अब विकास की मिसाल बन रहे हैं—जहां विरोध नहीं, बल्कि स्वागत हो रहा है।